28 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में सेंसेक्स में 1124 अंकों की गिरावट ने निवेशकों को भारी झटका दिया। इस दिन सेंसेक्स कमजोर प्रदर्शन करते हुए 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में व्यापक बेचैनी देखी गई। सेंसेक्स में इस तरह की बड़ी गिरावट निवेशकों की बेचैनी और बाजार की अनिश्चितता को दर्शाती है।
सेंसेक्स 1124 अंकों की गिरावट के कारण हुआ व्यापक नुकसान
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,124.02 अंक गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 360.25 अंक टूटकर 22,780.25 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट निफ्टी के मनोवैज्ञानिक स्तर 22,800 के नीचे फिसलने का संकेत है। इस भारी गिरावट के कारण निवेशकों को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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कुल मिलाकर बीएसई की कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 7.5 लाख करोड़ रुपये घटकर 4,75,74,703 करोड़ रुपये पर आ गया। यह गिरावट बाजार की कमजोरी और निवेशकों की बेचैनी को दर्शाती है।

चौतरफा बिकवाली से बाजार में गिरावट का माहौल
बाजार में चौतरफा बिकवाली का असर साफ दिखा। बीएसई पर 4,717 शेयरों में से 3,100 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। केवल 1,367 शेयरों में बढ़त देखी गई और 250 शेयर स्थिर रहे। इस बात से जाहिर होता है कि ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में दबाव था।
विशेष रूप से, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, भारती एयरटेल और इंफोसिस जैसे बड़े शेयर्स में भारी बिकवाली ने सेंसेक्स और निफ्टी पर नकारात्मक प्रभाव डाला। यह बाजार की कमजोरी और बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई गिरावट
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली इस गिरावट का मुख्य कारण बनी। पिछले कारोबारी सत्र में FIIs ने 3,696 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी फंड के बाहर निकलने से बाजार में नकदी की कमी और दबाव बढ़ा।
रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरना भी इस बिकवाली को बढ़ावा देने वाला कारक रहा। रुपया 20 पैसे टूटकर 95.95 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती ने भारतीय बाजारों को कमजोर किया।
वैश्विक भू-राजनीतिक संकट ने बढ़ाई बाजार की चिंता
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। तेल की महंगाई से बाजार में दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी निवेशकों को सतर्क कर रही है। ये वैश्विक कारण बाजार की नकारात्मकता को बढ़ा रहे हैं और सेंसेक्स में गिरावट के पीछे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
आम निवेशकों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सेंसेक्स में इतनी बड़ी गिरावट का असर सीधे आम निवेशकों पर पड़ता है। जिन लोगों ने शेयर बाजार में निवेश किया है, उन्हें अपने निवेश में भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, बाजार की अनिश्चितता से नई निवेश योजनाओं पर भी दबाव आता है।
आर्थिक वृद्धि की उम्मीदों पर भी इस गिरावट का असर हो सकता है। जब बाजार में भारी गिरावट होती है, तो पूंजी प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे कंपनियों के विस्तार और विकास की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
आगे बाजार का क्या हो सकता है
विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक तनाव कम नहीं होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। सेंसेक्स और निफ्टी के स्तर और नीचे जा सकते हैं।
हालांकि, बाजार में सुधार के लिए घरेलू और वैश्विक सकारात्मक संकेतों की जरूरत होगी। निवेशकों को सतर्कता बरतनी चाहिए और बाजार की चाल पर ध्यान देना होगा।



