कैंसर दवाओं के दामों में भारी कमी की खबर से मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन करते हुए 543 ब्रांड्स की कीमतों में 40% से लेकर 90% तक की कटौती की है। यह बदलाव 9 नवंबर 2026 से एटा सहित पूरे देश में लागू होंगे।
कैंसर दवाओं के दामों में 90% तक की कटौती क्यों जरूरी थी
कैंसर की दवाओं पर मरीजों का आर्थिक बोझ बहुत अधिक होता है। लंबे इलाज और महंगी दवाओं के कारण कई परिवार आर्थिक तंगी का सामना करते हैं। इसलिए, कैंसर दवाओं की कीमतें कम करना जरूरी था। NPPA ने ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित कर व्यापारियों और अस्पतालों के मुनाफे को नियंत्रित किया है। इससे दवाओं की कीमतें कम होने के साथ-साथ मरीजों के लिए उपचार सस्ता होगा।
👉 यह भी पढ़ें:
- भोपाल में बनेगी प्रदेश की पहली सरकारी आयुर्वेद फार्मेसी, दवाएं आधी कीमत में
- पुणे में डेंगू के 2,000 से ज्यादा केस, सालभर क्यों बना रहता है खतरा?
- लालकृष्ण आडवाणी दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती, सीने में संक्रमण की शिकायत
- DAVV में शुरू होगी गर्भ संस्कार की पढ़ाई, योग और पोषण पर मिलेगी ट्रेनिंग
- एक पखवाड़े में दूसरी बार MP आएंगे राहुल गांधी, 1 अक्टूबर को बालाघाट में मृत आदिवासी परिवारों से करेंगे मुलाकात
- भोपाल में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, सितंबर में 43 नए मामले सामने आए

NPPA ने 543 कैंसर दवाओं के दामों में संशोधन किया
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने कुल 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं के तहत 543 ब्रांड्स की कीमतें घटाई हैं। उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर की दवा Anastrozole की कीमत ₹695.76 से घटकर ₹73 कर दी गई है। इसी तरह Azacitidine इंजेक्शन ₹6,337 से ₹1,495.04, Bevacizumab ₹21,767.70 से ₹5,930.13 और Palbociclib दवा ₹40,421.33 से ₹2,720 रह गई है।
महंगी पेटेंटेड दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं
हालांकि, कई महंगी और पेटेंटेड दवाओं की कीमतों में कोई कटौती नहीं हुई है। MSD फार्मा की इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda जिसकी कीमत ₹2,16,500 है, और AstraZeneca की Tagrisso जैसी दवाएं इस बार संशोधन से बाहर रखी गई हैं। यह इसलिए क्योंकि इनके ट्रेड मार्जिन पहले से ही 30% की सीमा में थे।

9 नवंबर से नई कीमतें एटा और देशभर में लागू होंगी
NPPA द्वारा जारी नई दरें 9 नवंबर 2026 से उत्तर प्रदेश के एटा जिले सहित पूरे भारत के मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में लागू होंगी। इसका उद्देश्य कैंसर मरीजों को आर्थिक रूप से सुलभ दवाएं उपलब्ध कराना है। इससे मरीजों का इलाज आसान होगा और वे बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकेंगे।
कैंसर मरीजों के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव
कैंसर की दवाओं के दामों में कटौती से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। लंबे समय तक चलने वाले कैंसर उपचार में दवाइयों का खर्च सबसे बड़ा होता है। दामों में कमी से अधिक मरीज उचित इलाज करा पाएंगे। हालांकि, यह राहत पूरी तरह तभी संभव होगी जब दवाएं सही कीमतों पर उपलब्ध होंगी और मरीजों तक पहुंचेंगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त नाराजगी के बाद लिया गया फैसला
यह कदम सुप्रीम कोर्ट की ओर से अस्पतालों और रिटेलर्स द्वारा कैंसर दवाओं पर लगाये जा रहे अत्यधिक मार्जिन पर जताई गई नाराजगी के बाद उठाया गया है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए NPPA को निर्देशित किया था। अब इस फैसले से दवाओं की कीमतें ज्यादा मुनाफा उठाने वालों के चंगुल से बाहर होंगी।



