देश में 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना 2027, जो 28 फरवरी तक चलेगी। यह जनगणना देश की आठवीं आधिकारिक जनसंख्या गणना होगी और इसके तहत देश की आबादी, जातिगत संरचना और बुनियादी सुविधाओं की व्यापक जानकारी एकत्रित की जाएगी। गृह मंत्रालय और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत संचालित होगी।
जनगणना 2027 का विस्तृत समय-सीमा और संदर्भ तिथि
जनगणना 2027 का मुख्य कार्य 25 जनवरी 2027 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 के बीच पुनरीक्षण चरण आयोजित होगा, जिसमें एकत्रित आंकड़ों की पुनः जांच की जाएगी। संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) निर्धारित की गई है, जो जनसंख्या की गणना के लिए आधार होगी। यह तारीख निर्णयों और नीतिगत योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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यह पहली बार होगा जब जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे डेटा संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक होगी।

जनगणना 2027 में स्व-गणना की सुविधा
जनगणना शुरू होने से पहले नागरिकों को 10 जनवरी 2027 से 24 जनवरी 2027 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भरने का विकल्प मिलेगा। इस स्व-गणना विकल्प से लोगों को सरलता होगी और प्रशासन को नवीनतम आंकड़े प्राप्त होंगे। यह सुविधा डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा देगी।
स्व-गणना के बाद घर-घर जाकर प्रगणकों द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसमें कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें जाति, डिजिटल साक्षरता, आवास, आर्थिक गतिविधि और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
कौन से राज्य और क्षेत्र जनगणना 2027 में शामिल नहीं होंगे
अधिसूचना के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और आंतरिक संघर्ष से प्रभावित मणिपुर में 25 जनवरी से 28 फरवरी के दौरान जनगणना का संचालन नहीं होगा। इसके अलावा, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के अत्यधिक हिमपात वाले इलाकों को भी इस चरण से बाहर रखा गया है।
मणिपुर में जनगणना अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। यह निर्णय चुनावी निष्पक्षता और सुरक्षा कारणों से लिया गया है। इन राज्यों में चुनाव समाप्त होने के बाद जनगणना की संभावित तारीखों की घोषणा की जाएगी।
जातिगत आंकड़ों की पहली व्यापक गणना
जनगणना 2027 में स्वतंत्रता के बाद पहली बार व्यापक जातिगत आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। यह 1931 के बाद पहली बार होगा जब जाति को विस्तार से दर्ज किया जाएगा। इससे सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायता मिलेगी।
जातिगत आंकड़ों के अलावा, जनगणना में डिजिटल साक्षरता, आर्थिक स्थिति, रोजगार, शिक्षा और आवास जैसी जानकारियां भी एकत्रित की जाएंगी। इससे देश की विविधता और विकास की स्थिति का सटीक चित्र मिलेगा।
जनगणना 2027 का व्यापक प्रभाव और उपयोगिता
जनगणना 2027 के आंकड़े सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन, संसाधनों के वितरण और विकास कार्यों में मार्गदर्शन देंगे। यह आंकड़े राज्य और केंद्र सरकार दोनों के लिए नीति निर्धारण में आधार का काम करेंगे।
आम नागरिकों के लिए भी यह जानकारियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे उनकी जरूरतों के अनुसार योजनाएं और सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध हो सकेंगी। डिजिटल जनगणना के कारण डेटा संग्रहण अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद होगा।
आगे की प्रक्रिया और चुनौतियां
जनगणना 2027 के बाद आंकड़ों का विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने का काम होगा। इसके लिए कई महीनों का समय लगाया जाएगा। हालांकि, डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रहण से प्रक्रिया में तेजी आएगी।
चुनौतियों में चुनावी राज्यों में स्थगित गणना, भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में पहुंच और स्व-गणना के दौरान डिजिटल साक्षरता की कमी शामिल हैं। प्रशासन को इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष रणनीतियां बनानी होंगी।



