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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल,तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनावों के बीच चुनाव आयोग का एक पुराना लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पर केरल भाजपा की मुहर लगी हुई है। इसके बाद विपक्षी दलों ने इतना बवाल मचाया कि चुनाव आयोग को सफाई देनी पड़ी।
सीपीआईएम ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया है। 19 मार्च 2019 के इस लेटर के साथ लगे हलफनामे पर केरल भाजपा की मुहर दिखाई दे रही है। सीपीआईएम ने सवाल किया कि क्या अब चुनाव आयोग और भाजपा एक ही पावर सेंटर से चल रहे हैं? वहीं कांग्रेस ने पूछा कि चुनाव आयोग के पास भाजपा की मुहर कैसे पहुंची। कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को भेजे गए पत्र पर चुनाव आयोग की मुहर के बजाय केरल भाजपा की मुहर लगी थी। यह कोई गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर संदेह का विषय है। इससे संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं। कांग्रेस ने पूछा कि चुनाव आयोग के आधिकारिक संदेश पर किसी राजनीतिक दल की मुहर कैसे लगी? चुनाव आयोग भाजपा के कठपुतली की तरह क्यों व्यवहार कर रहा है? क्या चुनाव आयोग भारत की जनता को इसका स्पष्टीकरण दे सकता है? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि क्या अबकी बार, मोदी सरकार भी इसी तरह की क्लेरिकल एरर का परिणाम था? तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि आधिकारिक तौर पर यह स्वीकृति मिल गई है कि चुनाव आयोग भाजपा की बी-टीम बन गई है।
चुनाव आयोग ने बताया क्लेरिकल एरर
इस संबंध में चुनाव आयोग ने कहा कि हमें यह जानकारी मिली है कि भाजपा की मुहर लगी चुनाव आयोग की एक चिट्ठी कई मलयालम न्यूज चैनलों पर प्रसारित की जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय स्पष्ट करता है कि यह केवल एक क्लेरिकल एरर थी, जिसे तुरंत पहचान कर सुधार लिया गया।



