गीतांजलि एक्सप्रेस में कैंसर मरीज की मौत के बाद यात्रियों को 12 घंटे शव के साथ सफर करना पड़ा। यह घटना 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई से हावड़ा जा रही ट्रेन संख्या 12859 के एम-2 कोच में हुई।
कैंसर मरीज विनोद पासवान की मौजदगी में हुई मौत
45 वर्षीय विनोद पासवान, जो पश्चिम बंगाल के भाटपारा के निवासी थे, मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल से कैंसर का इलाज कराकर अपने परिवार के साथ घर लौट रहे थे। शनिवार सुबह लगभग 8:00 बजे उनकी मौत ट्रेन के एम-2 कोच में हो गई। इस घटना के बाद भी रेलवे प्रशासन ने शव को उतारने या चिकित्सा सहायता देने में विलंब किया।
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यात्रियों को 12 घंटे शव के साथ सफर करने की मजबूरी
मौत की सूचना देने के बाद यात्रियों ने ऑन-ड्यूटी टीटीई को सूचित किया, लेकिन रेलवे की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। इसके कारण यात्रियों को करीब 12 घंटे तक शव के साथ ही ट्रेन में सफर करना पड़ा। ट्रेन रात 8:26 बजे झारखंड के टाटानगर स्टेशन पर पहुंची, जहां शव को उतारा गया।
रेलवे की देरी और यात्रियों की शिकायतें
गीतांजलि एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से लगभग 12 घंटे देरी से चल रही थी। इस दौरान यात्रियों ने बार-बार शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। एक यात्री स्वाति जोशी ने शाम 7:00 बजे सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और रेल मदद को टैग कर इस मामले की जानकारी दी, तब जाकर प्रशासन में हलचल आई।

ट्रेन की खराब सफाई और खानपान की स्थिति
इस घटना के साथ ही यात्रियों ने ट्रेन की सफाई व्यवस्था और खानपान सेवा की भी आलोचना की। कोच में गंदगी और शौचालयों का बदहाल हाल यात्रियों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बना। रेलवे की ओर से कोई राहत या साफ-सफाई का इंतजाम नहीं था, जिससे विशेषकर बुजुर्ग और महिला यात्री प्रभावित हुए।
रेलवे प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल
घटना के बाद रेलवे प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की कमी पर सवाल उठे हैं। मेडिकल सहायता ना मिलने और शव को लंबे समय तक कोच में रखने से यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान की अनदेखी हुई। यह मामला रेलवे की सेवा गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने की जरूरत
रेलवे को आवश्यक कदम उठाकर ऐसी घटनाओं को रोकने की जरूरत है। यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के लिए त्वरित चिकित्सा सहायता और शव प्रबंधन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इससे न केवल यात्रियों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि रेलवे की छवि भी सुधरेगी।



