नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है और मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को दबाने का प्रयास है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 24 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि वे और उनका संगठन पीस बॉन्ड नहीं साइन करेंगे।
नेहा बोरा की निवारक हिरासत और पुलिस नोटिस का विवाद
16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान निवारक हिरासत में लिया था, जिसे अगले दिन रिहा कर दिया गया। इसके बाद 17 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 126 के तहत नेहा बोरा को ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड और जमानतदार पेश करने का नोटिस दिया। यह नोटिस शांति बनाए रखने के लिए जारी किया गया था, जिसे नेहा बोरा ने संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया।
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दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका और कोर्ट का आदेश
नेहा बोरा ने पुलिस नोटिस और हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने इसे असंवैधानिक और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन बताया। हालांकि 23 अक्टूबर को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सभी प्रासंगिक दस्तावेज याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस मामले में अदालत ने प्रक्रिया के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
नेहा बोरा ने मोदी सरकार पर किया कड़ा हमला
24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने सरकार और पुलिस पर आरोप लगाए कि वे पीस बॉन्ड का इस्तेमाल नागरिकों के विरोध दर्ज करने के अधिकार को दबाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपने मताधिकार और विरोध जताने के अधिकार की भी रक्षा करनी होती है। उन्होंने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कठोर कार्रवाई पर सवाल उठाए।

पीस बॉन्ड का लोकतंत्र और विरोध अधिकार पर प्रभाव
पीस बॉन्ड वह कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत किसी व्यक्ति को जांच के दौरान शांति बनाए रखने का वचन देना पड़ता है। नेहा बोरा के अनुसार, इसका दुरुपयोग विरोध के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों की जिम्मेदारी है और इसे दबाना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
आगे की रणनीति और कानूनी लड़ाई
नेहा बोरा ने कहा कि AISA पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है और इस नोटिस को कानूनी तौर पर चुनौती देना जारी रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करेगी और नागरिकों के विरोध के अधिकार की रक्षा करेगी। संगठन के कार्यकर्ता SEM के समक्ष पेश होंगे लेकिन बॉन्ड पर साइन नहीं करेंगे।



