नेहा बोरा ने CJP प्रोटेस्ट से किया खुद को अलग, यह बात उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में 22 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान स्पष्ट की। नेहा बोरा, जो ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ने यह भी कहा कि 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में उनका कोई लेना-देना नहीं था।
नेहा बोरा के वकील ने कोर्ट में दिया तर्क
नेहा बोरा के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में बताया कि 16 अक्टूबर को नेहा बोरा अपने संगठन AISA के आह्वान पर मंडी हाउस में थीं, न कि CJP के सेंट्रल पार्क में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में। उन्होंने कहा कि नेहा बोरा की हिरासत पूरी तरह से गैर-कानूनी थी क्योंकि उन्होंने केवल शांतिपूर्ण तरीके से कुछ नारे लगाए थे।
👉 यह भी पढ़ें:
- नेहा बोरा दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची, दिल्ली पुलिस के पीस बॉन्ड नोटिस पर दायर की याचिका
- दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस पर प्रदर्शन कर रही नेहा बोरा को हिरासत में लिया
- सोनम वांगचुक ने कहा देश में अघोषित इमरजेंसी, दिल्ली प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई पर भड़के
- कंगना रनौत ने अश्लील AI कंटेंट के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की, नोटिस हुआ जारी
- दिल्ली हाई कोर्ट: भारत में मजदूरों को मिलता है सबसे कम वेतन, नहीं होती कद्र
शंकरनारायणन ने पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिस पर भी सवाल उठाए, जिसमें नेहा से ₹10,000 का व्यक्तिगत मुचलका भरने को कहा गया था। उनके अनुसार, इस नोटिस में दी गई वजह उचित नहीं है और वह इसे अदालत में चुनौती दे चुकी हैं।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और हिरासत का विवाद
दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को CJP के प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा को हिरासत में लिया था। हालांकि, उन्हें अगले दिन 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया। पुलिस ने 17 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के आदेश पर नेहा से शांति बनाए रखने के लिए पर्सनल बॉन्ड भरने को कहा था।
इस आदेश के खिलाफ नेहा बोरा ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
कोर्ट में नेहा बोरा की छवि पर हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान अदालत ने नेहा बोरा की छवि को लेकर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नेहा को पहले से ही ‘बैड बॉय’ की तरह पेश किया गया है और अब उनसे अच्छे व्यवहार का वादा मांगा जा रहा है।
सरकार की ओर से अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि नेहा बोरा पर छह एफआईआर दर्ज हैं और वह निर्दोष नहीं कही जा सकतीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेहा ने एक बैठक में हिस्सा लिया था, जहां ‘रिजीम चेंज’ की बात की गई थी।

नेहा बोरा की प्रतिक्रिया और संगठन का पक्ष
नेहा बोरा के वकील ने अदालत में कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की बात करना गलत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेहा ने केवल मंडी हाउस में शांतिपूर्ण तरीके से जुटने की अपील की थी, न कि किसी हिंसा या कानून तोड़ने का आह्वान।
नेहा बोरा ने CJP के प्रोटेस्ट से खुद को अलग कर लिया है और कहा है कि उनका प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। यह साफ करता है कि उनके ऊपर लगे आरोप राजनीतिक रूप से भड़काने वाले हैं।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित परिणाम
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है और जल्द ही इस पर निर्णय सुनाया जाएगा। यह फैसला नेहा बोरा के भविष्य और उनके संगठन AISA की राजनीतिक सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अगर अदालत ने पुलिस के आदेश को गलत ठहराया, तो यह नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता के लिए एक मिसाल बनेगा। वहीं, अगर आदेश सही पाया गया, तो इससे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई सख्त होने की संभावना बढ़ेगी।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानूनी अधिकारों का महत्व
यह मामला भारत में नागरिक अधिकारों और प्रदर्शन की स्वतंत्रता के बीच संतुलन का उदाहरण है। नेहा बोरा ने कोर्ट में अपनी निष्पक्षता जताई और हिंसा में शामिल नहीं होने का दावा किया।
नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें, जबकि पुलिस और सरकार का दायित्व होता है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखें पर अत्यधिक दमन न करें। इस विवाद से आम जनता में इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा बढ़ी है।



