लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे अधिकारी ही रहें, राजनीतिक कार्यकर्ता न बनें। यह चेतावनी उन्होंने 21 अक्टूबर 2026 को मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के मोहान रोड स्थित अभिनंदन रिसॉर्ट में एक श्रद्धांजलि सभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दी। अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।
अधिकारी राजनीतिक कार्यकर्ता न बनें, वरना जेल जाएंगे
अखिलेश यादव ने कहा कि अधिकारी अगर राजनीतिक कार्यकर्ता बनेंगे तो सत्ता परिवर्तन के बाद जेल जाने के लिए तैयार रहें। उन्होंने मुख्य रूप से बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों पर आरोप लगाए कि वे आगामी चुनाव और शिक्षक-स्नातक निर्वाचन में शिक्षकों को फोन कॉल करके डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। यह आरोप चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है।
👉 यह भी पढ़ें:
- अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए 12 सवाल, नोटबंदी से डिजिटल फ्रॉड तक मांगा जवाब
- अयोध्या में अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ने की चुनौती दी
- मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर किया तीखा हमला
- गोरखपुर में सपा के अंदर कुर्सी की जंग, पूर्व जिलाध्यक्ष को थप्पड़ मारा
- मायावती का समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला, PDA को करार दिया छलावा
- अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर आरोप, कहा अब निष्पक्षता नहीं बची

चुनाव में अधिकारियों के दुरुपयोग के सबूत मौजूद
सपा प्रमुख ने कहा कि अधिकारियों द्वारा चुनाव में की जा रही हेराफेरी के पर्याप्त रिकॉर्डिंग और सबूत उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ये सबूत उन्हें जेल भेजने के लिए काफी होंगे। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि सपा प्रशासनिक बेईमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को तैयार है।
चुनाव आयोग से निष्पक्ष चुनाव की अपील
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह चुनाव प्रक्रिया की पूरी निगरानी करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वोटिंग और वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की धांधली न हो। उनका मानना है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए ताकि लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।

वोटर लिस्ट के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आम जनता के पास वोटर लिस्ट नहीं होती, जबकि सत्ताधारी दल के मंत्रियों और नेताओं के पास इस डेटा की पहुंच है। इसका इस्तेमाल वॉइस कॉलिंग के जरिए चुनाव प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। इससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
शिक्षामित्रों को शिक्षक का दर्जा देने का वादा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा दिया जाएगा और उन्हें स्थायी सरकारी नौकरी मिलेगी। यह घोषणा शिक्षण क्षेत्र में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों के लिए आशा की किरण है।
राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला
अखिलेश यादव ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को भ्रष्टाचार का गढ़ बताया और प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वे बिना प्रशासनिक बेईमानी के निष्पक्ष चुनाव नहीं जीत सकती। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीति को और गरमा देगा।
इस तरह, अखिलेश यादव ने अधिकारियों को साफ संदेश देते हुए चुनाव में निष्पक्षता बनाए रखने और राजनीतिक दखल से दूर रहने को कहा है। यह बयान आगामी चुनाव के दौरान प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर नए विवादों को जन्म दे सकता है।



