गोरखपुर में सपा के अंदर कुर्सी की जंग ने एक बार फिर पार्टी की अंदरूनी अस्थिरता को उजागर किया है। यह विवाद 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:45 बजे गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के सभागार में समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी की व्यवस्था को लेकर विवाद
समाजवादी पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस वार्ता में कुर्सी पर बैठने को लेकर पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी और वरिष्ठ नेता अंशुमान सिंह के बीच बहस शुरू हुई। अंशुमान सिंह ने नगीना से बगल की जगह बनाने को कहा, लेकिन नगीना साहनी ने बताया कि बगल में पहले से काजल निषाद बैठी हैं, इसलिए जगह खाली नहीं है।
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अंशुमान सिंह के समर्थकों द्वारा थप्पड़ मारने की घटना
कुर्सी की जंग के बाद विवाद बढ़ गया और आरोप है कि अंशुमान सिंह के समर्थकों ने नगीना साहनी को थप्पड़ मारा और उनके साथ हाथापाई की। इस झड़प के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफरा-तफरी मच गई और इसे बीच में ही रोकना पड़ा।
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
नगीना साहनी ने आरोप लगाया कि अंशुमान सिंह के समर्थक हथियारों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए थे और उनके साथ मारपीट की गई। वहीं, अंशुमान सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवाद की शुरुआत नगीना साहनी ने की थी। उन्होंने कहा कि कुर्सी की जगह को लेकर बातचीत के दौरान विवाद हुआ और इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
घटना का वीडियो और मीडिया में वायरल होना
यह घटना प्रेस क्लब में लगे सीसीटीवी कैमरों और पत्रकारों के कैमरों में कैद हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे समाजवादी पार्टी के अंदरूनी विवाद सार्वजनिक हो गए हैं।
पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और भविष्य की कार्रवाई
सपा के जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ने इस घटना को अनुशासनहीनता बताया और कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस मामले की जानकारी दी जाएगी। इसके अनुसार पार्टी नेतृत्व आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद के कारण प्रेस वार्ता में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेता अलग-अलग समूहों में आए थे।
समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के चुनावों के लिए टिकट की दावेदारी जोर पकड़ रही है। नगीना साहनी और अंशुमान सिंह दोनों गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से सपा के टिकट के दावेदार हैं। कुर्सी की जंग ने टिकट को लेकर पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और बढ़ा दिया है।
आगे देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है। आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह घटना पार्टी की छवि पर असर डाल सकती है, खासकर तब जब पार्टी लोकतंत्र बचाने का संदेश दे रही हो।



