इंदौर। मध्यप्रदेश की व्यावसायिक नगरी सफाई, खानपान के साथ ही माफियाओं के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। शायद मध्यप्रदेश में जमीनों को लेकर सबसे ज्यादा विवाद इंदौर में होते हैं। लोग शिकायत भी करते हैं, केस भी दर्ज होते हैं लेकिन होता कुछ नहीं। भूमाफिया ऐसे मदारी हैं, जिनके इशारे पर जमीनों और कानून व्यवस्था से जुड़े सारे विभाग जमूरे की तरह नाचते हैं।
डायमंड कॉलोनी विवाद के बाद जगी थी उम्मीद
वैसे तो भूमाफियाओं के खिलाफ कई अभियान चल चुके हैं और जब भी ऐसा होता है तो वर्षों से अपने घर का सपना संजोए बैठे लोगों की उम्मीदें जगती हैं। वैसे होता कुछ नहीं। अब देख लीजिए ना भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि कुछ समय पहले उन्होंने डायमंड कॉलोनी में कनाड़िया थाने के दो पुलिसकर्मियों को पीट कर लहूलुहान कर दिया था। ताज्जुब तो इस बात का है कि इसके बाद भी टीआई से लेकर अधिकांश अधिकारी इस मामले को छुपाने में जुट गए। दोनों पुलिसकर्मियों की जुबान पर ताला मरवा दिया गया, लेकिन जब हल्ला मचा तो पुलिस कमिश्नर की सख्ती पर केस दर्ज हुआ।
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हर मामले की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में
जिस डायमंड कॉलोनी की जमीन के विवाद में कनाड़िया थाने के पुलिसकर्मियों से झड़प हुई थी, उसका पूरा खेल एक जेल रिटर्न भूमाफिया ने जमाया था। जब कार्रवाई शुरू हुई और पूछताछ होने लगी तो ऐसा लगा कि इस बार तो पुलिस दम दिखा कर ही रहेगी। पुलिस के साथ प्रशासन भी जुट गया था, ऐसे में उम्मीद और बढ़ गई लेकिन हुआ कुछ नहीं।
इस जमीन को लेकर नया नहीं था विवाद
इस जमीन पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि पूर्व में भी बब्बू-छब्बू जैसे गुंडों ने इस जमीन से कब्जे हटवाए थे। एक पार्षद ने भी पहले ऐसी कोशिश की थी, लेकिन बाद में वह पीछे हट गए। जेल रिटर्न भूमाफिया ने इसपर कब्जे की सुपारी ली। खुद भी पार्टनर बना और काम को अंजाम देने में जुट गया।
केस दर्ज होने के बाद भी कुछ नहीं होता
डायमंड कॉलोनी मामले के उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने एमआईजी थाने में दर्ज कुछ केस में चालान पेश होने के आदेश दिए थे। विडंबना यह कि एमआईजी ही नहीं, शहर के विभिन्न थानों में भूमाफियाओं के खिलाफ सैकड़ों केस दर्ज हैं, लेकिन उनमें चालान पेश नहीं होता। कुछ दिनों तक गहमागहमी रही, फिर मामला शांत हो गया।
हर विभाग को कैसे दे देते हैं मात
भूमाफियाओं को लेकर एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे हर विभाग को कैसे मात दे देते हैं। उनका सबसे ज्यादा साथ सहकारिता विभाग देता है। इसके बाद आईडीए, नगर निगम, टीएनसीपी, राजस्व विभाग भी उन्हीं के साथ खड़ा नजर आता है। कहा तो यहां तक भूमाफियाओं को यहां तक पता होता कि कौन से मामले की फाइल किस विभाग में कहां रखी है।
आम जनता की जमीन पर खड़ा होगा मॉल
डायमंड कॉलोनी की जमीन पर अब मॉल खड़ा करने की तैयारी है। इसके लिए एक बड़े बिल्डर से सौदा भी हो चुका है। विवादों और पुलिस केस के बाद भी यहां से कब्जे हटाए जा रहे हैं। कायदे से यह जमीन वर्षों से मकान की आस लगाए बैठे संस्था के सदस्यों को मिलनी चाहिए, लेकिन देखते ही देखते यहां मॉल खड़ा हो जाएगा।
अयोध्यापुरी के प्रकरण ने भी चौंकाया
हाल ही में सरकारी विभागों की लापरवाही के कारण भूमाफियाओं को अयोध्यापुरी की जमीन के मामले में जीत मिली है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस जमीन को पीड़ित भूखंडधारियों को दिलाने के लिए सरकार कवायदें कर रही है, उसी केस में सरकारी विभागों ने इतनी लापरवाही बरती कि फैसले भूमाफियाओं के पक्ष में हो गया। इससे साफ जाहिर है कि भूमाफियाओं के आगे सब नतमस्तक हैं।
हर मामले में एक भूमाफिया, दो लाइनजर
सूत्र बताते हैं कि चाहे मामला डायमंड कॉलोनी का हो या अयोध्यापुरी का, हर मामले में एक जेल रिटर्न भूमाफिया और दो लाइजनर यशवंत और विशाल के नाम आते हैं। बताया जाता है कि ये दोनों भोपाल से लेकर उज्जैन तक की धौंस देकर काम कराने की सुपारी लेते हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।



