इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण योजना क्रमांक 171 की 13 गृह निर्माण संस्थाओं के भूखंडधारियों के पक्ष में फैसला लेने जा रहा है। इसके लिए 13 अक्टूबर को बोर्ड बैठक बुलाई गई है। बड़ा सवाल यह है कि इन 13 संस्थाओं के ऑडिट को लेकर ही कई आपत्तियां हैं। जब तक इनका निराकरण नहीं हो जाता है, आखिर आईडीए कोई फैसला कैसे ले पाएगा?
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सहायक आयुक्त (अंकेक्षण), सहकारिता, जिला इंदौर ने 28 सितंबर 2025 को इन 13 संस्थाओं के ऑडिट को लेकर एक पत्र जारी किया था। इसमें गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के वर्ष 2024-25 तक के ऑडिट का उल्लेख है। इनमें मारुति, सनी, श्री कृपा, अप्सरा, इंदौर विकास, लक्ष्मण नगर, संजना, रजत, सूर्या, त्रिशला और न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। इसके अनुसार कई संस्थाओं का ऑडिट पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ मामलों में ऑडिट टिप्पणियां अभी परीक्षणाधीन हैं। धारा 72 के तहत प्राथमिकता सूची तैयार करने के लिए भी संबंधित संस्थाओं को निर्देशित किए जाने का उल्लेख है।
प्लॉटधारकों के कंधे का हो रहा इस्तेमाल
इन योजनाओं में 13 गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनें उलझी हुई हैं। आईडीए ने कुछ महीनों पहले इन संस्थाओं से विकास शुल्क की राशि जमा कराने को कहा था, उस समय भूमाफियाओं ने जमीनें मुक्त कराने के लिए राशि भर दी थी। कुछ संस्थाओं ने तो दूसरी संस्थाओं के पैसे भी जमा कर दिए थे। तब शिकायतें हुई थीं और जांच-पड़ताल भी हुई। शहर के कई कुख्यात भूमाफिया इन स्कीमों की जमीनें मुक्त कराने में लंबे समय से जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि प्लॉटधारकों के कंधे का इस्तेमाल कर वे अपना निशाना साध लें।
बिना कलेक्टर की जांच के नहीं मिले प्लॉट
सूत्र बताते हैं कि सीईओ ने इसके लिए जो प्रस्ताव बनाया है, उसके अनुसार सहकारिता विभाग जो सूची देगी उसके आधार पर प्लॉटों का आवंटन कर दिया जाएगा। जबकि, पहले यह तय हुआ था कि सहकारिता विभाग जांच कर प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजगा। कलेक्टर राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जांच कर सूची आईडीए को सौंपेंगे। अगर इसके बगैर आईडीए मामले का निराकरण करता है तो यह और उलझ जाएगा।
प्लॉटधारकों से लिया जाए शपथ पत्र
आईडीए को प्लॉटधारकों से यह शपथ पत्र भी लेना चाहिए कि उनका या परिवार के किसी सदस्य का अन्य संस्था या स्कीम में कोई प्लॉट नहीं है। सहकारिता के नियमों के अनुसार यह जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो भी यह मामला उलझेगा।
वरिष्ठ अधिकारी अब रखें ध्यान
चूंकि 13 संस्थाओं का मामला काफी उलझा हुआ है। इसको लेकर ईओडब्ल्यू से लेकर लोकायुक्त तक में कई केस चल रहे हैं। कई एफआईआर है और कोर्ट केस भी है। ऐसे में संभागायुक्त व वर्तमान आईडीए अध्यक्ष और कलेक्टर को इस मामले पर संज्ञान लेना होगा। यहां वर्षों से भूखंड के लिए भटक रहे लोगों के न्याय का सवाल है, इसलिए यह देखना जरूरी है कि भूखंड धारकों को आगे कोई परेशानी न हो।
ऑडिट में कई जमीन विवाद आ रहे सामने
दस्तावेज में सनी और रजत गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के संदर्भ में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था से जुड़े भूमि विवाद का उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि कथित अवैध रूप से विकसित भूखंडों और रजिस्ट्रियों को निरस्त कराने के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय, इंदौर में प्रकरण क्रमांक आरसीसीएस/ए/644/2025 प्रस्तुत किया गया है, जो विचाराधीन है। भूमि विवाद के चलते प्राथमिकता का निर्धारण नहीं किए जाने की बात भी दर्ज है। श्री कृपा गृह निर्माण सहकारी संस्था के मामले में पंजीयन के बाद से निष्क्रिय रहने और संस्था के रिकॉर्ड व क्रय भूमि की जानकारी उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख है। दस्तावेज के मुताबिक, इस कारण पंजीयन नस्ती के आधार पर ऑडिट टीम तैयार की गई थी, लेकिन मौजूदा स्थिति में संस्था की प्राथमिकता तय नहीं की जा सकती।
दो संस्थाओं पर कार्रवाई की प्रक्रिया
दस्तावेज में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के वर्ष 2007-08 तक के ऑडिट को पूरा बताया गया है, जबकि आगे के वर्षों का ऑडिट लंबित है। दस्तावेज में इस संस्था के उपाध्यक्ष को पद से पृथक करने संबंधी कार्यालयीन आदेश का उल्लेख करते हुए दूसरे उपाध्यक्ष को ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। वहीं, मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था के वर्ष 2023-24 का ऑडिट पूरा और वर्ष 2024-25 का ऑडिट लंबित बताया गया है। इस मामले में मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 56(3) के तहत नोटिस जारी किए जाने तथा सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय किए जाने का उल्लेख है।
ऐसे में भूखंड धारकों को कैसे मिलेगी राहत?
दस्तावेज से स्पष्ट है कि सहकारी संस्थाओं के ऑडिट, भूमि विवाद और प्राथमिकता सूची तैयार करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। हालांकि, यह दस्तावेज अपने आप में योजना 171 के सभी भूखंडों की मुक्ति की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं करता। इसलिए प्रभावितों को राहत कब मिलेगी, इसका जवाब संबंधित प्रकरणों के निराकरण और आईडीए की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
अधिकांश ऑडिट पर आपत्ति
दस्तावेज में यह भी स्पष्ट है कि अंकेक्षण पूरा होना अपने आप में संस्था के सभी जमीन संबंधी विवादों या अनियमितताओं के समाप्त होने का प्रमाण नहीं है। कुछ संस्थाओं के मामलों में सहकारिता विभाग की टिप्पणियां और न्यायालयीन कार्यवाही विशेष रूप से उल्लेखित हैं।
ऑडिट को लेकर कुछ प्रमुख टिप्पणियां
-मारुति गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर अंकेक्षण टीम की जांच प्रक्रिया का उल्लेख भी है और धारा 72 के अनुसार वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
-सन्नी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था से अवैध रूप से विकसित भूखंड खरीदने का उल्लेख। रजिस्ट्रियां निरस्त कराने के लिए न्यायालयीन प्रकरण विचाराधीन।
– श्री कृपा गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर पंजीयन के बाद से निष्क्रिय रहने, रिकॉर्ड और भूमि संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख।
-वरिष्ठता तय न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर धारा 72 के अनुसार वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश।
-देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर वर्ष 2007-08 तक का अंकेक्षण पूर्ण; आगामी वर्षों का लंबित अंकेक्षण नहीं कराने के कारण पहले अध्यक्ष को पद से पृथक करने और बाद में उपाध्यक्ष को भी पद से पृथक कर दूसरे उपाध्यक्ष को अंकेक्षण पूर्ण कराने के निर्देश देने का उल्लेख।
-मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर वर्ष 2023-24 का अंकेक्षण पूर्ण; वर्ष 2024-25 का लंबित मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 56(3) के तहत 30 अगस्त 2026 को नोटिस। 6 अक्टूबर 2026 को अंतिम कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर 14 अक्टूबर 2026 को सुनवाई तय किए जाने का उल्लेख।
केस हारता जा रहा सहकारिता विभाग
एक तरफ तो पीड़ितों को भूखंड दिलाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ इसमें आ रही अड़चनों को दूर नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि सहकारिता विभाग कोर्ट में लगातार केस हारता जा रहा है। हाल ही में देवी अहिल्या संस्था और सिम्पलेक्स के विवाद में यही हुआ है। इस प्रकरण में सिम्पलेक्स को कोर्ट से राहत मिल गई है।



