इंदौर। गांधी नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था से जुड़े ऑडिट और रिकॉर्ड की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। इसके बाद इंदौर के उप अंकेक्षक आशीष सेठिया के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्यप्रदेश के कार्यालय ने 28 सितंबर 2026 को उन्हें विभागीय जांच का अंतिम कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। इसके पहले हुई विभागीय जांच में लगाए गए आरोपों को प्रमाणित बताया गया है।
दस्तावेज के मुताबिक मामला गांधी नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर में भूखंडों के आवंटन, नामांतरण, सदस्यता, रसीदों और संस्था के रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं का है। विभागीय जांच में यह सवाल भी सामने आया कि जिन मामलों में नियमों के तहत परीक्षण और ऑडिट किया जाना था, वहां निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
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धारा 59 की जांच में भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में संस्था के संबंध में मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 59 के तहत की गई जांच का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार संस्था से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई बिंदुओं पर आपत्तियां सामने आईं। जांच अधिकारी ने विभिन्न दस्तावेजों, पूर्व के परीक्षण प्रतिवेदनों और अधिकारियों के बयानों के आधार पर मामले की जांच की। विभागीय जांच में यह भी उल्लेखित है कि संस्था के कामकाज, भूखंडों के आवंटन और सदस्यों से संबंधित रिकॉर्ड में कई ऐसे बिंदु थे, जिन पर विभागीय स्तर से कार्रवाई अपेक्षित थी।
भाइयों के नाम भूखंड का मामला भी शामिल
जांच रिपोर्ट में आशीष सेठिया के भाइयों से जुड़े भूखंडों और रसीदों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार संस्था द्वारा वर्ष 2014 में कुछ भूखंडों के संबंध में रसीदें जारी किए जाने तथा बाद में नामांतरण से संबंधित रिकॉर्ड सामने आए। जांच में यह सवाल उठाया गया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना संबंधित रिकॉर्ड और रसीदों के आधार पर कार्रवाई कैसे हुई।
भूखड आवंटन की प्रक्रिया में गड़बड़ी
दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि संस्था के पुराने रिकॉर्ड, सदस्यता समाप्ति, सदस्यता राशि तथा भूखंड आवंटन से संबंधित प्रक्रिया की जांच की गई। एक मामले में सदस्यता समाप्त करने के बाद राशि वापस किए जाने तथा बाद में उसी सदस्य के नाम से भूखंड संबंधी कार्रवाई के तथ्य भी जांच के दायरे में रहे।
एक ही परिवार को एक से अधिक भूखंड
जांच रिपोर्ट में संस्था द्वारा एक ही परिवार के व्यक्तियों को सदस्यता प्रदान करने और भूखंड आवंटित किए जाने के मामले का भी उल्लेख है। इसके अलावा एक व्यक्ति को एक से अधिक भूखंड आवंटित किए जाने से संबंधित प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभागीय जांच में इन मामलों से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में संस्था की कार्यवाही, सदस्यता रजिस्टर, रसीद बुक और भूखंडों के नामांतरण से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच का आधार बनाया गया।
पुलिस रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा
जांच के दौरान पुलिस थाना एरोड्रम में दर्ज अपराध प्रकरण के रिकॉर्ड सहित संस्था के पुराने रिकॉर्ड और बैठक की कार्यवाही का भी परीक्षण किया गया। जांच अधिकारी ने संस्था के वर्ष 2014-15 के रिकॉर्ड तथा बाद के वर्षों में हुए नामांतरण और सदस्यता संबंधी दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया।
पद के दायित्व के अनुरूप नहीं हुआ काम
विभागीय जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में आशीष सेठिया द्वारा अपने पद से जुड़े कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता के संबंध में टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने से गंभीर अनियमितताओं के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
विभाग ने दिया पक्ष रखने का समय
सहकारिता विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। आशीष सेठिया को विभागीय जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराते हुए अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
कई जांचों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
आशीष सेठिया लंबे समय से विभाग में टिके हैं। उनके खिलाफ पूर्व में भी कई जांच हो चुकी है, लेकिन वे हर बार बच निकलते हैं। सेठिया पर भूमाफियाओं के साथ मिलकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगते रहे हैं। अब जबकि विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, देखना होगा कि इस बार उन पर क्या कार्रवाई होती है।



