मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मामले की अगली तारीख 27 अक्टूबर 2026 तय की है।
सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। इस नोटिस के साथ केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और अन्य चुनाव आयुक्तों को भी जवाब देने के लिए कहा गया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े फैसलों में अन्य दो आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया।
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कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनके कामकाज पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है। कोर्ट ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता।
सुनवाई की अगली तारीख और पीठ की जानकारी
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है।
यह सुनवाई चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता और नियमों के पालन से जुड़ी है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर जांच में एकतरफा फैसलों का आरोप सही पाया गया, तो वह उन फैसलों को रद्द भी कर सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोपों का सार
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने SIR प्रक्रिया के दौरान नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने बिना अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के करीब 14 फैसले लिए। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
याचिकाकर्ता यह भी मांग करते हैं कि आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को कड़ाई से लागू किया जाए और ऐसे एकतरफा फैसलों को असंवैधानिक घोषित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 विवाद पर टिप्पणी की
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दौरान फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस संबंध में रिकॉर्ड मांगा है ताकि पता चल सके कि फॉर्म-6 में बदलाव किसके आदेश पर हुए।
यह विवाद चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमों के बिना हुए बदलावों को वह स्वीकार नहीं करेगा।
आम आदमी पर प्रभाव और आगे की संभावनाएं
चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता पर यह मामला सीधे लोकतंत्र की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। अगर चुनाव आयोग के फैसलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
आगे की सुनवाई में आयोग के जवाब और मामले की जांच के आधार पर सुप्रीम कोर्ट निर्णायक कदम उठा सकता है। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की संभावना भी बनी हुई है।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट का रुख
याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। उन्होंने 2023 के चुनाव आयोग कानून की धारा 16 का हवाला देते हुए बताया कि CEC को व्यापक सुरक्षा मिली है, लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केवल मीडिया रिपोर्ट पर आधारित कोई तत्काल आदेश नहीं देगा। पहले आयोग से जवाब मांगा जाएगा। अगर आयोग के जवाब में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, तो कोर्ट उन फैसलों को रद्द करने पर विचार करेगा।



