इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण की करीब 300 रुपए करोड़ की जमीन धारा 53 के तहत हाई कोर्ट से छूट गए है। बताया जाता है कि ये सारी जमीनें रसूखदारों, बड़े बिल्डरों और बड़ी कंपनियों की हैं। यहां सवाल यह उठ रहा है कि क्या आईडीए इन जमीनों को वापस लेने की कानूनी लड़ाई लड़ेगा?
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हाईकोर्ट ने दिए थे जमीन छोडने के आदेश
सुपर कॉरिडोर की दो योजनाओं में शामिल लगभग 16 लाख स्क्वेयर फीट जमीन छोड़ने के आदेश हुए हाल ही में हुए हैं। धारा 53 की व्याख्या करते हुए हाईकोर्ट ने जमीन मालिकों को लाभ दिया और चार हफ्ते में जमीन छोड़ने की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। इनकी कीमत करीब 300 करोड रुपए बताई जा रही है।
आखिर धारा 53 में क्या है प्रावधान
नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 53 के तहत यह जमीन छूटी है। सरल भाषा में प्राधिकरण का कहना है कि यदि जमीन स्वीकृत मास्टर प्लान/योजना के अनुसार विकास के लिए जरूरी है, तो कुछ परिस्थितियों में जमीन को योजना से बाहर/छोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है।
जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट में क्या किया?
जिन जमीन मालिकों की जमीन छोड़ने के आदेश हुए, उनमें से कई ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अपील/याचिका की। कुछ पुराने मामलों में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने जमीन मालिकों को राहत दी थी। प्राधिकरण ने उन सिंगल बेंच के फैसलों के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की।
16 लाख स्क्वेयर फीट जमीन कौन-सी है?
ये जमीनों में सुपर कॉरिडोर की योजना 169-A और 169-B का उल्लेख है। इनमें कुल मिलाकर साढ़े 14 हेक्टेयर से अधिक जमीन का जिक्र है, जो लगभग 16 लाख स्क्वेयर फीट बैठती है। इन जमीनों का वर्तमान कच्ची जमीन का मूल्य ₹300 करोड़ से अधिक है। ये जमीनें भौरासला, कुमेड़ी, टिगरिया बादशाह और बड़ा बांगड़दा आदि क्षेत्रों की हैं।
प्लांड तरीके से चल रहा है खेल
इस पूरे मामले में आईडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आईडीए के पास इतनी बड़ी लीगल टीम है। सारे अधिकार हैं। सारे नियम-कानून हैं, फिर भी जमीन मालिक आईडीए पर भारी कैसे पड़ जाते हैं?
सारी जमीन रसूखदारों की
सूत्र बताते हैं कि ये सारी जमीनें रसूखदारों और बड़ी कंपनियों की हैं। इन कंपनियों की आईडीए में कितनी पकड़ है, यह भी सबको पता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि आईडीए अफसरों की मिलीभगत के बिना ऐसा हो नहीं सकता।
अब देखना होगा क्या करता है आईडीए
अब बड़ा सवाल यह है कि आईडीए अपनी जमीन बचाने के लिए क्या करता है? कुछ मामलों में अपील की खबर भी आई है, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि अफसरों की मिलीभगत से आईडीए केस हार जाए।



