हैदराबाद में सेना के 3 जवानों ने हथियार चोरी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। इस मामले में कुल 7 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। चोरी की यह घटना सिकंदराबाद के बोलारम मिलिट्री आर्मरी से हुई, जहां से अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद चोरी हो गया। मुख्य आरोपी उप्पुथोल्ला मल्लेश, जो जून 2026 में रिटायर हुए थे, इस चोरी का केंद्र बिंदु हैं।
हैदराबाद में सेना के 3 जवानों ने हथियार चोरी की वारदात कब और कैसे की?
हैदराबाद में सेना के 3 जवानों ने हथियार चोरी की वारदात 30 और 31 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात को अंजाम दी। चोरी बोलारम स्थित मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन के शस्त्रागार से हुई। 31 अगस्त को इस चोरी की सूचना लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारा बोलारम पुलिस स्टेशन में दी गई। चोरी के दौरान शस्त्रागार के ताले टूटे हुए पाए गए थे।
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चोरी का पता तब चला जब गोला-बारूद भंडारण कक्ष खोलने पर ताले टूटे हुए मिले। सेना ने आंतरिक जांच शुरू की और पुलिस ने भी मामले की जांच तेज कर दी।

मुख्य आरोपी उप्पुथोल्ला मल्लेश कौन हैं और उनकी सेवानिवृत्ति कब हुई?
मुख्य आरोपी उप्पुथोल्ला मल्लेश 37 वर्षीय हवलदार थे, जो मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में तैनात थे। उन्हें अनुशासनहीनता और खराब स्वास्थ्य के चलते 16 साल की सेवा के बाद 30 जून 2026 को समय से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया गया था।
उनकी नाराजगी और कर्ज में डूबे साथियों के दबाव में उन्होंने इस चोरी की योजना बनाई थी। मल्लेश ने हथियार चोरी के बाद इन्हें पश्चिम बंगाल के कथित हथियार तस्करों को बेचने का सौदा भी किया था।
हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी में क्या-क्या मिला?
पुलिस ने चोरी किए गए सभी हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए हैं। इनमें 4 एके-203 राइफल, 1 इंसास राइफल, 7 पिस्तौल (6 9 एमएम और 1 6.35-बोर), 3 दूरबीन और 1,800 से अधिक कारतूस शामिल हैं। कारतूस में 9 एमएम के 1,156 और एके-203 के 720 राउंड थे।
यह हथियार अत्याधुनिक और सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। उनकी बरामदगी से सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक उजागर हुई है।

सेना के 3 जवानों समेत 7 गिरफ्तार, उनकी भूमिका क्या रही?
पुलिस ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस मामले में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें मद्रास रेजिमेंट के 3 सेवारत सैनिक भी शामिल हैं। ये थे सिपाही कोंदुरी शेशुलु, कोट कर्मचारी विनोद कुमार और हवलदार कुचरकांति प्रवीण।
इन जवानों ने चोरी के दौरान ताले तोड़ने और योजना बनाने में मल्लेश की मदद की। इसके अलावा मल्लेश के दो साथी उप्पुथोल्ला मल्लिकार्जुन और चेम्माकर निरंजन तथा पश्चिम बंगाल के दो कथित हथियार तस्कर भी गिरफ्तार हुए हैं।
चोरी के पीछे का मकसद और जांच में क्या मिला?
जांच में पता चला कि उप्पुथोल्ला मल्लेश अपने समय से पहले रिटायर हो जाने से नाराज था। वह और उसके साथी कर्ज में डूबे हुए थे। उन्होंने बैंकों, ज्वेलरी दुकानों और अमीर लोगों को लूटने की योजना बनाई थी।
इसके लिए वे चोरी के हथियारों का इस्तेमाल करना चाहते थे। मल्लेश ने हथियारों को तस्करों को बेचने का सौदा भी किया था, जिससे पता चलता है कि यह चोरी संगठित थी। पुलिस इस मामले में और भी खुलासे की उम्मीद कर रही है।
हैदराबाद में सेना के 3 जवानों ने हथियार चोरी का आम जनता पर असर
हैदराबाद में सेना के 3 जवानों ने हथियार चोरी की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। आम जनता की सुरक्षा पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। चोरी हुए हथियारों के गलत हाथों में जाने से अपराध और आतंकवाद को बढ़ावा मिल सकता है।
सेना और पुलिस को मिलकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। साथ ही, जवानों के मनोबल और अनुशासन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।



