इंदौर। मध्यप्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इसके लिए कई दावेदार अभी से कमर कस कर बैठ गए हैं। इंदौर की कई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार बदलने की संभावना है। इनमें से कुछ पारंपरिक सीटें भी हैं, जिनके लिए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कोई भागवत करा रहा है, तो कोई पोता होने की खुशी में पूरी विधानसभा में लड्डू बांट रहा है तो कोई चुनरी यात्रा निकालकर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में है।
भागवत के बहाने बाबा की सीट पर निगाहें
इंदौर की पांच नंबर विधानसभा में इस बार भाजपा के उम्मीदवार बदलने की संभावना है। यहां से बाबा यानी महेंद्र हार्डिया लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे 2003, 2008, 2013, 2018 और 2023 में यहां से चुने गए। उम्र का तकाजा सहित अन्य फैक्टर के कारण इस बार यह सीट बदली जा सकती है। यहां महापौर परिषद के सदस्य राजेश उदावत सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे भागवत कथा के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश में हैं।
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खुद को मान लिया बाबा का उत्तराधिकारी
भाजपा के नेता कह रहे हैं कि बाबा ने अब तक अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया, लेकिन उदावत खुद को उनका उत्तराधिकारी समझने लगे हैं। उदावत इन दिनों महापौर परिषद में मलाईदार पद पर बैठे हुए हैं और लगातार यह जता रहे हैं कि वे ही दावेदार हैं।
पोता हुआ तो संजय शुक्ला ने बांटे लड्डू
कैलाश विजयवर्गीय से बुरी तरह हार के बाद कांग्रेस से भाजपा में आए संजय शुक्ला की उम्मीदें भी कम नहीं हैं। वर्तमान में प्रदेश में मंत्री विजयवर्गीय की हालत को देखते हुए उन्हें ऐसा लग रहा है कि अगली बार शायद उन्हें मौका मिल जाए। इसलिए वे अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। अब तो पार्टी का भी झंझट नहीं हैं। हाल ही में संजय शुक्ला दादा बने हैं। इसकी खुशी में वे पूरी विधानसभा में लड्डू बांट रहे हैं। शुक्ला पहले भी विधानसभा एक में कई धार्मिक आयोजन करा चुके हैं, जब वे कांग्रेस में थे। भाजपा नेता इसे संजय शुक्ला की दावेदारी की उम्मीद से जोड़कर देख रहे हैं।
चुनरी यात्रा के बहाने सुदर्शन चलाने की तैयारी
पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता एक बार फिर पूरी ताकत से चुनरी यात्रा निकालने में जुटे हैं। इसकी तैयारियों के लिए की जा रही बैठकों में भी वे विधानसभा एक के ओरिजनल भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। यात्रा में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। भाजपा में इस बात की चर्चा है कि विजयवर्गीय की दुर्गति को देखते हुए सुदर्शन गुप्ता को लग रहा है कि एक बार फिर से उन्हें मौका मिल सकता है।
अन्य विधानसभाओं में भी लगी हैं निगाहें
इंदौर के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी दावेदारों की निगाहें लगी हुई हैं। इसमें सबसे ज्यादा उठापटक चार नंबर विधानसभा को लेकर भी है। नेताओं को लग रहा है कि लगातार एक ही परिवार के कब्जे के बाद शायद बिल्ली के भाग्य से झींका टूट जाए और उन्हें टिकट मिल जाए। इस कोशिश में वर्तमान में बड़े पदों पर बैठे नेता भी शामिल हैं। अब देखना होगा कि ऊंट आखिर किस करवट बैठता है।



