वसंत कुंज में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इस घटना में पीड़िता को लगातार वीडियो कॉल के जरिए कड़ी निगरानी में रखा गया और उसके बैंक खातों, सोने तथा प्रॉपर्टी का दुरुपयोग कर कुल ₹2.25 करोड़ से अधिक की ठगी की गई।
डिजिटल अरेस्ट के दौरान महिला को धमकाया गया
6 अप्रैल 2026 को वसंत कुंज की 75 वर्षीय महिला के लैंडलाइन फोन पर कॉल आई। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताया। उन्होंने महिला को बताया कि उसका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले से जुड़ा है। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में लोगों ने महिला को धमकाया कि उसके बच्चे विदेश से गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। महिला की बेटी राधिका नीदरलैंड में रहती हैं। इस डर से महिला को लगभग 22 दिनों तक लगातार डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।
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बैंक खातों से ₹3 लाख की ठगी और सोना गिरवी रखने का दबाव
डिजिटल अरेस्ट की अवधि में महिला को डराकर वसंत कुंज स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा से ₹3 लाख ट्रांसफर करवाए गए। इसके अतिरिक्त, ठगों ने मुथूट फिनकॉर्प में 83.5 ग्राम सोने के गहने गिरवी रखवाकर ₹4.95 लाख का गोल्ड लोन लिया और रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवाई। महिला स्तन कैंसर से पीड़ित हैं और अकेली रहती हैं, जिससे वे मानसिक दबाव में आ गईं।
फ्लैट के दस्तावेज हड़प कर जबरन बिक्री कराई गई
ठगों ने महिला के घर तक पहुँचकर उनके 2 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के फ्लैट के मूल दस्तावेज हड़प लिए। 13 अप्रैल को प्रॉपर्टी डीलर सुषांत कुमार और उसके सहयोगियों ने महिला से दस्तावेज हासिल कर 15 अप्रैल को जबरन फ्लैट की बिक्री करवा दी। इस प्रक्रिया में कुल ₹2.25 करोड़ की ठगी हुई। महिला के दस्तावेजों और संपत्ति का दुरुपयोग कर ठगों ने भारी रकम हड़प ली।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कंबोडिया कनेक्शन बताया
मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि इस डिजिटल अरेस्ट घोटाले के पीछे कंबोडिया से संचालित एक साइबर गैंग शामिल है। पुलिस ने ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने पुलिस की धीमी कार्रवाई के कारण दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की है।
डिजिटल अरेस्ट क्या है और आम आदमी पर इसका प्रभाव
डिजिटल अरेस्ट का मतलब है किसी व्यक्ति को लगातार इंटरनेट या वीडियो कॉल के माध्यम से निगरानी में रखना, जिससे वह मानसिक तौर पर दबाव में आ जाता है। ऐसे मामलों में आम लोग विशेषकर बुजुर्ग और बीमार लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इस घटना से स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी किस तरह डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं।
मामले में आगे की कार्रवाई और सावधानियां
पुलिस मामले की जांच में जुटी है और बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल सहित सभी आवश्यक सबूत जुटा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए लोगों को किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल में पुलिस या अधिकारियों का दावा करने वाले लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। साथ ही, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना और समय-समय पर अपने खातों की निगरानी करना जरूरी है।



