विदेशी फंडिंग कानून पर JPC में चर्चा का दौर जारी है, जिसमें एसबीआई प्रमुख ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। यह चर्चा विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत हो रही है, जिसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता और नियंत्रण को मजबूत करना है।
विदेशी फंडिंग कानून पर JPC की बैठक हुई 29 सितंबर को
विदेशी फंडिंग कानून पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने 29 सितंबर 2026 को अपनी दूसरी बैठक आयोजित की। इस बैठक में गृह मंत्रालय, विधि मंत्रालय के अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
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इस कानून का मकसद विदेशी अंशदान के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए, इस विधेयक पर गहन विचार-विमर्श की जरूरत थी।

SBI प्रमुख ने विदेशी फंडिंग कानून पर दिए अहम सुझाव
एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने बैठक में विदेशी फंडिंग कानून के तहत बैंक खातों और लेनदेन के प्रबंधन पर स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण रद्द या समाप्त होता है, तो बैंक को इसकी आधिकारिक सूचना मिलने में समय लग सकता है। इस बीच के लेनदेन को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है।
इसलिए, एसबीआई ने सुझाव दिया कि बैंक पर कोई प्रतिबंध तभी लागू हो जब सरकार से प्रमाणित सूचना प्राप्त हो। इससे पहले हुए वैध लेनदेन को कानूनी सुरक्षा देना जरूरी है।
फ्रीजिंग और खाता संचालन को लेकर SBI की मांग
एसबीआई ने यह भी पूछा कि जब सरकारी प्राधिकरण के पास नियंत्रण आता है, तो खाता पूरी तरह फ्रीज किया जाना चाहिए या उसे चालू रखा जाए। साथ ही, खाते में आने वाले पैसों के क्रेडिट और फिक्स्ड डिपॉजिट और ब्याज भुगतान की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए।
यह स्पष्टता बैंकों को नियमों का पालन करने में मदद करेगी और विदेशी फंडिंग कानून की प्रभावशीलता बढ़ाएगी।

विपक्षी सांसदों ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की
विपक्षी सांसदों ने जेपीसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा को वर्तमान 7 दिनों से बढ़ाकर कम से कम 4 सप्ताह करने की मांग की। डीएमके के सांसद पी. विल्सन सहित अन्य सदस्यों ने इसके लिए बैठक को टालने की भी अपील की।
उनका तर्क था कि इस जटिल कानून को समझने और प्रभावित पक्षों को पर्याप्त समय देने के लिए समय सीमा बढ़ाना आवश्यक है।
सरकार ने सुरक्षा कारणों से विधेयक का समर्थन किया
गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य अधिकारियों ने जेपीसी को बताया कि देश में वर्तमान में 14,440 सक्रिय एफसीआरए खाते हैं। सरकार ने कहा कि यह संशोधन राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता मजबूत करने के लिए जरूरी है।
उन्होंने विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता पर बल दिया।
विदेशी फंडिंग कानून का आम आदमी पर प्रभाव
विदेशी फंडिंग कानून के संशोधन से एनजीओ और अन्य संगठनों के लिए नए नियम लागू होंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी लेकिन कुछ मामलों में प्रक्रियाएं जटिल हो सकती हैं।
बैंकों की सुरक्षा और स्पष्ट नियमों से आम जनता को वित्तीय लेनदेन में अतिरिक्त विश्वास मिलेगा। हालांकि, समय सीमा बढ़ाने की मांग से यह प्रक्रिया और अधिक समावेशी और पारदर्शी बन सकती है।



