शाहरुख खान, टाइगर श्रॉफ और अजय देवगन ने महाराष्ट्र के खाद्य औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा जारी पान मसाला सरोगेट विज्ञापन से जुड़े कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है। इस मामले में तीनों अभिनेताओं की सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। यह कार्रवाई विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर हुई थी, जिसे सरोगेट विज्ञापन माना गया था।
महाराष्ट्र FDA ने तीनों अभिनेताओं को नोटिस जारी किया था
महाराष्ट्र FDA ने अगस्त 2026 के मध्य में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजा था। नोटिस का मुख्य आरोप था कि विमल इलायची का विज्ञापन असल में पान मसाला यानी तंबाकू उत्पादों का अप्रत्यक्ष प्रचार कर रहा है। महाराष्ट्र में 2012 से ऐसे सरोगेट विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
FDA ने इस विज्ञापन अभियान से जुड़े सभी प्रमोशनल कंटेंट को हटाने और भविष्य में इस तरह के विज्ञापनों का हिस्सा न बनने के निर्देश भी दिए थे।

शाहरुख, टाइगर और अजय देवगन ने नोटिस का लिखित जवाब दिया
29 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने मीडिया को जानकारी दी कि तीनों अभिनेताओं ने नोटिस का लिखित जवाब दे दिया है। इसके बाद दो अभिनेताओं ने व्यक्तिगत या प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई की मांग की, जिसे विभाग ने पूरा किया।
कमिश्नर ने हालांकि स्पष्ट नहीं किया कि सुनवाई में शामिल दो अभिनेता कौन थे। जवाब और सुनवाई के बाद अब विभाग कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
सरोगेट विज्ञापन पर महाराष्ट्र में सख्त प्रतिबंध लागू है
सरोगेट विज्ञापन का मतलब है किसी प्रतिबंधित उत्पाद जैसे तंबाकू, पान मसाला आदि का अप्रत्यक्ष प्रचार करना। महाराष्ट्र में 2012 से इस तरह के विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI), 2006 के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन करने पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और 1 से 3 साल तक की विज्ञापन प्रतिबंध की सजा हो सकती है। इसलिए FDA की कार्रवाई गंभीर मानी जा रही है।
तीनों अभिनेताओं के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी
नोटिस का जवाब और सुनवाई पूरी होने के बाद अब महाराष्ट्र FDA आगामी कानूनी कदम उठा रहा है। विभाग इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उचित कार्रवाई करेगा।
यह मामला विज्ञापन उद्योग और फिल्म जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, खासकर जब यह सरोगेट विज्ञापन प्रतिबंध की बात आती है।
आम जनता और फिल्म उद्योग पर संभावित प्रभाव
सरोगेट विज्ञापन के खिलाफ यह कार्रवाई आम जनता के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए जरूरी है। इसके अलावा, फिल्म उद्योग को भी इस दिशा में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है ताकि वे कानूनों का उल्लंघन न करें।
यह केस यह स्पष्ट करता है कि बड़े स्टार्स भी कानूनी नियमों के दायरे से बाहर नहीं हैं। इससे विज्ञापन संबंधी नैतिकता और जिम्मेदारी पर भी सवाल उठते हैं।
आगे क्या हो सकता है इस मामले में
अब महाराष्ट्र FDA द्वारा आगामी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद जुर्माने या प्रतिबंधों का फैसला हो सकता है। इसके अलावा, यह मामला कोर्ट तक भी जा सकता है यदि पक्षकार अपनी बात न्यायालय में रखना चाहें।
विभाग की कार्रवाई से फिल्म जगत और विज्ञापन कंपनियों को स्पष्ट संदेश मिलेगा कि नियमों का पालन अनिवार्य है। इससे भविष्य में सरोगेट विज्ञापन की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।



