महू-खंडवा रेल ट्रैक पर 1.34 लाख पेड़ काटने का काम अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इस परियोजना के तहत पुराने मीटर-गेज रेलवे ट्रैक को ब्रॉड-गेज में बदला जा रहा है, जिससे इंदौर और मुंबई के बीच दूरी कम होगी और दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। पेड़ों की कटाई मध्य प्रदेश के इंदौर और खरगोन जिलों के वन क्षेत्रों में की जाएगी।
महू-खंडवा रेल ट्रैक परियोजना का उद्देश्य और विस्तार
महू-खंडवा रेल ट्रैक पर 1.34 लाख पेड़ काटने की योजना ब्रॉड-गेज ट्रैक निर्माण के लिए है। इससे 156 किलोमीटर लंबी मीटर-गेज लाइन को बड़ा बनाया जाएगा। यह कदम रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यात्रा समय को कम करने में मदद करेगा। परियोजना से दक्षिण भारत के कई हिस्सों से जुड़ाव और मजबूत होगा।
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्य प्रदेश में 7 शहरों में 351 बसों की सुगम परिवहन सेवा शुरू, CM मोहन यादव और नितिन गडकरी ने हरी झंडी दिखाई
- इंदौर हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर सख्त कार्रवाई का आदेश
- मध्य प्रदेश के 70 हजार शिक्षकों की सैलरी बढ़ोतरी के रास्ते खुले, हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते दिए
- कोयला खदान पर सियासी संग्राम: जीतू पटवारी ने एमपी सरकार से मांगा जवाब
- मध्य प्रदेश में 35.42 लाख पेंशनधारकों के खाते में 212 करोड़ रुपए ट्रांसफर
- मप्र में अगले चार दिन भारी बारिश की संभावना, अलर्ट जारी
इसके अलावा, यह बदलाव आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा क्योंकि माल और यात्री ट्रैफिक में सुधार होगा। इस तरह की परियोजना से क्षेत्र के विकास की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

पेड़ों की कटाई का चरणबद्ध कार्य और पर्यावरण संरक्षण
वन विभाग और रेलवे की संयुक्त समिति ने पेड़ों की कटाई को 20 चरणों में बांटने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया अक्टूबर 2026 के बाद मानसून समाप्त होने पर शुरू होगी। सभी पेड़ों को एक साथ नहीं काटा जाएगा, जिससे पर्यावरण पर प्रभाव कम होगा।
इसके साथ ही, रेलवे 16 सुरंगें और ऊंचे पुल बनाएगा, जिनसे करीब 17,000 पेड़ों को बचाया जा सकेगा। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण मंजूरी और वन भूमि डायवर्जन की स्थिति
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की क्षेत्रीय समिति ने इस परियोजना को मंजूरी दी है। मंजूरी के दौरान पर्यावरण सुरक्षा की कई शर्तें भी रखी गई हैं। वन भूमि डायवर्जन की अंतिम मंजूरी मिलने से यह परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
यह मंजूरी सुनिश्चित करती है कि परियोजना के दौरान पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन होगा और आवश्यक वनीकरण कार्य भी किया जाएगा।
प्रभावित वन क्षेत्र और वनीकरण की योजना
महू-खंडवा रेल ट्रैक परियोजना से इंदौर जिले का लगभग 407 हेक्टेयर और खरगोन जिले का लगभग 46 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होगा। कुल प्रभावित वन क्षेत्र लगभग 454 हेक्टेयर है।
पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए धार और झाबुआ जिलों में 916 हेक्टेयर भूमि पर 1,000 पौधे प्रति हेक्टेयर लगाने की योजना है। इस वनीकरण से पर्यावरण संतुलन कायम रखने का प्रयास किया जाएगा।
अधिकारियों के बयान और पर्यावरण नियमों का पालन
इंदौर के संभागीय वन अधिकारी लाल सुधाकर सिंह ने पुष्टि की है कि केंद्र से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई वन विभाग की सख्त निगरानी में चरणबद्ध तरीके से होगी।
रतलाम मंडल के रेलवे प्रबंधक अश्विनी कुमार ने भी पर्यावरण नियमों के पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
महू-खंडवा रेल ट्रैक परियोजना का आम आदमी पर प्रभाव
इस परियोजना से आम लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी और यात्रा में सुविधा मिलेगी। दूरी कम होने से आवागमन और माल परिवहन दोनों में तेजी आएगी। इसके परिणामस्वरूप रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन चरणबद्ध कटाई और वनीकरण योजना से इस नुकसान को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।



