24 सितंबर की गिरावट के बाद 25 सितंबर को शेयर बाजार में मामूली सुधार देखने को मिला। इस सुधार ने निवेशकों के मन में कुछ हद तक राहत की भावना पैदा की, हालांकि बाजार में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले दिन की भारी बिकवाली के बाद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
24 सितंबर को बाजार में आई भारी गिरावट
गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर चला। BSE सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67% गिरकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 50 में भी 383.70 अंक यानी 1.64% की गिरावट आई और यह 23,063.10 पर बंद हुआ। इस दिन बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण थे, जिनमें वैश्विक आर्थिक तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और मिडिल ईस्ट में तनाव प्रमुख रहे। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई।
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25 सितंबर को बाजार में सुधार के संकेत
पिछले दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में मामूली सुधार देखने को मिला। सेंसेक्स 315.20 अंक या 0.43% की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 ने भी 77.40 अंक यानी 0.34% की तेजी दिखाई और 23,140.50 के स्तर पर बंद हुआ। इस सुधार ने निवेशकों को कुछ विश्वास दिया कि बाजार ने गिरावट का एक चरण पार कर लिया है।
बैंकिंग और प्रमुख सेक्टर्स में सुधार
25 सितंबर को बैंक निफ्टी इंडेक्स में भी सकारात्मक रुख देखा गया। यह 141.91 अंक यानी 0.26% की मजबूती के साथ 55,580.40 पर बंद हुआ। इसके अलावा, ऑटो, FMCG, रियल्टी और मेटल जैसे सेक्टर्स में अच्छी तेजी आई, जिसने बाजार के समग्र सेंटीमेंट को बेहतर बनाया। इन सेक्टर्स की मजबूती ने बाजार को स्थिरता प्रदान की और गिरावट को सीमित रखा।
आईटी और फार्मा सेक्टर्स में कमजोरी
हालांकि बाजार में सुधार देखने को मिला, लेकिन IT और फार्मा सेक्टर्स में कमजोरी बनी रही। विशेष रूप से Infosys, TCS और HCL Tech जैसे प्रमुख IT शेयर दबाव में रहे और बिकवाली का सामना किया। यह सेक्टर्स वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण प्रभावित हुए हैं, जिससे निवेशकों ने इन शेयरों में सतर्कता बरती।
रुपए की स्थिति और वैश्विक कारण
25 सितंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे मजबूत होकर 95.90 पर खुला। यह मजबूती बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी (5.11% से 5.22%) और कच्चे तेल की कीमतें 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। ये वैश्विक कारक बाजार की अस्थिरता में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
शेयर बाजार की आगामी दिशा पर विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अभी सतर्क रहना होगा क्योंकि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निफ्टी 50 के लिए 23,000 का स्तर अहम समर्थन बना हुआ है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार और नीचे जा सकता है, जबकि 23,500-23,600 के बीच मजबूती आने पर सुधार की उम्मीद है। इसी तरह, सेंसेक्स के लिए 73,000-73,250 का जोन महत्वपूर्ण है। फिलहाल, बाजार की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतकों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।



