शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण 24 सितंबर 2026 को निवेशकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई। इस दिन भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 1247 अंक टूट गया और निफ्टी 23100 के नीचे बंद हुआ। बाजार की यह गिरावट कई कारणों से हुई, जिनका असर पूरे वित्तीय क्षेत्र पर पड़ा।
सेंसेक्स और निफ्टी में रिकॉर्ड गिरावट
24 सितंबर को सेंसेक्स 1247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 383.70 अंक या 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063.10 पर आ गया। इस दिन सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर लाल निशान में रहे। केवल एनटीपीसी ही बढ़त के साथ बंद हुआ। यह गिरावट बाजार की कमजोरी को दर्शाती है जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी।
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गिरावट के पीछे प्रमुख कारण
शेयर बाजार में गिरावट के कई कारण सामने आए। अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने निवेशकों की आशंकाओं को बढ़ाया। साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $102 से बढ़कर $106 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इसके अलावा वित्तीय और बैंकिंग सेक्टर में व्यापक बिकवाली ने बाजार दबाव को और बढ़ाया।
प्रमुख शेयरों में भारी नुकसान हुआ
इस गिरावट में बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज शेयर प्रमुख रूप से प्रभावित हुए। इन शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ। वहीं, सिप्ला और एनटीपीसी जैसे कुछ शेयर इस गिरावट से बच गए और मजबूती के साथ बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स की स्थिति
सिर्फ बड़े शेयरों में ही नहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत गिरावट आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.5 प्रतिशत नीचे आ गया। यह संकेत है कि बाजार की कमजोरी व्यापक स्तर पर फैली हुई है।
रुपये में कमजोरी का प्रभाव
भारतीय रुपया भी इस बाजार गिरावट से प्रभावित हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 11 पैसे गिरकर 95.84 के स्तर पर आ गया। घरेलू बाजार की मंदी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने रुपया कमजोर होने में अहम भूमिका निभाई। यह स्थिति आयातकों और आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय हो सकती है।
शेयर बाजार की भविष्य की संभावनाएं
भले ही वर्तमान में बाजार में गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी हो सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेतक निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। भविष्य में बाजार में स्थिरता आ सकती है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना होगा। प्रॉफिट बुकिंग और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए, निवेशकों को विवेकपूर्ण निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।




