इंदौर में अवैध जमीन पर प्रशासन की कार्रवाई ने शहर में हलचल मचा दी है। इंदौर में 100 करोड़ की अवैध जमीन पर बुधवार को जिला प्रशासन और इंदौर नगर निगम ने मिलकर संयुक्त रूप से अतिक्रमण-विरोधी अभियान चलाया। यह अभियान शहर के विकास और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर
साउथ तोड़ा क्षेत्र में स्थित कान्ह नदी के किनारे करीब 2 एकड़ की बेशकीमती सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया। इस कार्रवाई में 95 अवैध निर्माणों, जिनमें 50 से अधिक अवैध दुकानें और 45 कारखाने शामिल थे, को ध्वस्त कर दिया गया। इस कदम का उद्देश्य न केवल सरकारी जमीन को वापस पाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकना भी है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर कार्रवाई
यह अभियान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के तहत चलाया गया, जिसमें नदी के 30 मीटर दायरे में बने सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाना अनिवार्य था। NGT के इस निर्देश का मुख्य लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है। ऐसे कदम जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
प्रशासन की कार्यवाही का नेतृत्व
इस कार्रवाई का नेतृत्व इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर जूनी इंदौर के एसडीएम घनश्याम धनगर ने किया। नगर निगम की रिमूवल टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया। कलेक्टर वर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी और यह कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।

विरोध और हंगामे का सामना
कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने जमकर विरोध किया। भीड़ को हटाने के दौरान एक व्यक्ति ने एडिशनल डीसीपी विशेष अग्रवाल को धक्का दे दिया, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। यह घटना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन उन्होंने इसे शांतिपूर्ण ढंग से निपटाया।
आरोपियों की गिरफ्तारी
सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस अधिकारी से धक्का-मुक्की के आरोप में पुलिस ने छह युवकों को हिरासत में लिया। इस घटना ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
आगे की योजना और चुनौतियाँ
प्रशासन का अगला कदम पुनर्वास और विकास का है। हटाए गए लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएँ बनाई जा रही हैं। सरकार की यह पहल शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि, इस दौरान स्थानीय निवासियों का सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है।



