कामिका एकादशी को लेकर इस वर्ष तारीख को लेकर लोगों के बीच खासा भ्रम देखने को मिला है। कुछ पंचांगों में इसे 8 अगस्त से जोड़ा गया, जबकि नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणनाओं में 9 अगस्त को कृष्ण पक्ष एकादशी बताई गई है। कामिका एकादशी सावन/श्रावण कृष्ण पक्ष की महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा, दान और भगवान विष्णु के स्मरण का विशेष महत्व है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांग पद्धतियों के कारण व्रत और पारण के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या अपने क्षेत्र के विद्वान से समय की पुष्टि करना बेहतर माना जाता है।
नई दिल्ली के उपलब्ध पंचांग के अनुसार 9 अगस्त को एकादशी तिथि सुबह लगभग 11 बजे तक है और उसके बाद द्वादशी शुरू होती है। नक्षत्र के स्तर पर भी मृगशिरा के बाद आर्द्रा का क्रम बताया गया है।

इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत करते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या सात्विक भोजन के साथ व्रत रखते हैं। धार्मिक परंपराओं में एकादशी का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अनुशासन भी माना जाता है।
कामिका एकादशी की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यह सावन के धार्मिक माह में पड़ती है। सावन में शिव आराधना के साथ-साथ विष्णु से जुड़े व्रत और पर्व भी लोगों के बीच विशेष रुचि पैदा करते हैं। मंदिरों में पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दीपदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य किए जाते हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले “एकादशी का सही समय”, “पारण कब करें” या “आज व्रत है या कल” जैसे संदेशों को बिना जांचे आगे बढ़ाना उचित नहीं है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, तिथि समाप्ति और स्थानीय पंचांग के आधार पर समय में अंतर आ सकता है।



