करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। अमरनाथ धाम की कठिन यात्रा को आसान बनाने के लिए बालटाल और पहलगाम—दोनों मार्गों पर रोपवे (Ropeway) बनाने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार की योजना के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अगले वर्ष काम शुरू होगा और इसके पूरा होने के बाद श्रद्धालु बेहद कम समय में बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे।
अमरनाथ यात्रा रुट
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बालटाल मार्ग लगभग 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन यह सबसे कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता माना जाता है।
पहलगाम मार्ग करीब 48 किलोमीटर लंबा है और इसे पूरा करने में आमतौर पर 2 से 3 दिन लगते हैं।
Ropeway बनने से 10 घंटे का सफर सिर्फ 40 मिनट में
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अमरनाथ धाम तक केबल कार (Ropeway) परियोजना को मंजूरी दी है।
प्रस्ताव के अनुसार—
- बालटाल से अमरनाथ गुफा तक लगभग 9 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा।
- इससे मौजूदा 14 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा, जो लगभग 10 घंटे लेती है, घटकर करीब 40 मिनट रह जाएगी।
यह परियोजना बुजुर्गों, दिव्यांग श्रद्धालुओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
दोनों यात्रा मार्गों पर मिलेगी सुविधा
सरकार की प्रस्तावित योजना में दो प्रमुख Ropeway शामिल हैं—
- बालटाल – अमरनाथ गुफा
- पहलगाम – अमरनाथ मार्ग
यानी भविष्य में श्रद्धालुओं को दोनों प्रमुख मार्गों पर आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है।
DPR तैयार, अगले साल शुरू होगा निर्माण
रोपवे परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है।
इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML), जो NHAI की कंपनी है, ने इसकी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है।
जानकारी के अनुसार—
- अगले वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
- परियोजना को पूरा होने में लगभग दो वर्ष लग सकते हैं।
- यदि सब कुछ तय समय पर हुआ तो 2029 से श्रद्धालुओं को Ropeway सेवा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि Ropeway बनने से न केवल अमरनाथ यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
आपका क्या मानना है?
क्या अमरनाथ धाम तक Ropeway बनने से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, या इससे पारंपरिक यात्रा की आध्यात्मिक अनुभूति प्रभावित हो सकती है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।



