नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अब उज्जवला योजा के तहत दिए जाने वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी है। अब योजना के तहत दिए जाने वाले सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या घटाकर चार कर दी है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण माल खनूजा ने सोमवार को यह जानकारी दी। खनूजा ने बताया कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत से मेल खाती है। अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में तेज वृद्धि के कारण यह कदम उठाया गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हैं। इससे घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। भारत की एलपीजी आयात लागत सऊदी अनुबंध मूल्य से जुड़ी है, जो फरवरी से लगभग 46 फीसदी बढ़ी है।
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गरीब परिवारों के लिए शुरू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मई 2016 में गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। शुरुआत में लाभार्थियों को प्रति वर्ष 12 सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर मिलते थे। पिछले साल सब्सिडी कोटा घटाकर नौ सिलिंडर कर दिया गया था, और अब इसे और कम करके चार कर दिया गया है। सरकार ने मई 2022 में 200 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शुरू की थी। अक्तूबर 2023 में यह सब्सिडी बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की खुदरा कीमत 942 रुपये है। सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों को अब सिलिंडर के लिए 642 रुपये चुकाने होंगे।
अब तक 52 हजार करोड़ की सब्सिडी
सरकार 2022 से अब तक 52,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है। हालांकि, मूल्य वृद्धि के बावजूद तेल कंपनियों को प्रति 14.2 किलोग्राम सिलिंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान हो रहा है। वे पेट्रोल और डीजल को भी लागत से कम दरों पर बेच रही हैं। उन्हें पेट्रोल पर छह रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, तेल कंपनियों को 600-700 करोड़ रुपये का संचयी नुकसान हो रहा है।


