नई दिल्ली। भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कार्यभार संभाल लिया है। इसके बाद अपने संबोधन में उन्होंने भविष्य की प्लानिंग बता दी। उन्होंने कहा कि हम अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और सेना के आधुनिकीकरण पर सबसे पहला फोकस होगा।
जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें पाकिस्तान और चीन के मामलों का बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। उनका मुख्य उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिलिट्री थिएटरेशन’ (सैन्य थियेटराइजेशन) योजना को लागू करना और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना है।
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उन्होंने जनरल अनिल चौहान की जगह ली है। जनरल सुब्रमणि ने अपने पूर्ववर्तियों, दिवंगत जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के शानदार नेतृत्व और योगदान के प्रति आभार जताया। जनरल चौहान शनिवार को देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करके सेवानिवृत्त हुए। जनरल सुब्रमणि इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। वह पिछले साल 31 जुलाई को थल सेना के उप प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे।
पीएम के JAI लागू करने के लिए प्रतिबद्ध
पद संभालने के बाद जनरल सुब्रमणि ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य ध्यान सशस्त्र बलों के बदलाव और संगठनात्मक सुधारों पर होगा। वह प्रधानमंत्री के ‘JAI’ विजन यानी जॉइंटनेस (तालमेल), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (नवाचार) को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों की ट्रेनिंग और उनका कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बताया
जनरल सुब्रमणि ने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य आधार है। वह सेना में स्वदेशी हथियारों के विकास और उन्हें शामिल करने के काम में तेजी लाएंगे। आधुनिकीकरण के लिए सेना, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और रिसर्च क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। उन्होंने पूर्व सैनिकों और ‘वीर नारियों’ के कल्याण का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पूरा देश भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एकजुट है।
कठिन परिस्थितियों में काम करने में माहिर
40 सालों से अधिक के अपने कार्यकाल में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रामनी ने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी है तथा अनेक कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी दायित्व निभाए। उन्होंने ऑपरेशन राइनो के अंतर्गत असम में उग्रवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली। इसके अतिरिक्त उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड तथा चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में केंद्रीय सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व भी किया। उन्हें भारतीय सेना की पश्चिमी मोर्चे पर तैनात प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘II कोर’ की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त है।



