इंदौर। डेली कॉलेज बोर्ड के चुनाव होने के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब चुनावी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों का मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है और कोर्ट ने इस संबंध में जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसाइटी तथा साइबर क्राइम पुलिस को 15 दिन में विस्तृत जांच कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने बोर्ड से कहा है कि इस केस का फैसला होने तक कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले।
नरेंद्र सिंह बिड़वाल ने दायर की थी याचिका
हाईकोर्ट ने यह आदेश संस्थापक दाता श्रेणी के सदस्य नरेंद्र सिंह बिड़वाल द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता वीर कुमार जैन एवं अधिवक्ता पीयूष पाराशर ने की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नरेंद्र सिंह बिड़वाल का नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी द्वारा ऐसे आधारों पर निरस्त कर दिया गया, जिनका न तो सोसायटी के उपविधियों में कोई उल्लेख था और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के समय कोई वैध अस्तित्व था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके नामांकन को अवैध रूप से निरस्त कर उन्हें चुनावी मैदान से बाहर किया गया, जिससे संस्थापक दाता श्रेणी में केवल दो उम्मीदवार – राजा प्रियव्रत सिंह खींची और विक्रम सिंह पंवार (देवास) -ही मैदान में बचे और दोनों निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो गए।
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साइबर क्राइम पुलिस में भी हुई थी शिकायत
नरेंद्र सिंह बिड़वाल ने 4 मई 2026 को साइबर क्राइम पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स में छेड़छाड़ की गई है तथा जिन चुनावी गाइडलाइंस के आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया गया। वे वास्तव में बाद में वेबसाइट पर अपलोड की गईं, जबकि उन पर पूर्व की तारीख अंकित की गई थी। इसी प्रकार फर्म्स एवं सोसायटीज विभाग के समक्ष भी विस्तृत शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। हाईकोर्ट ने इन शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय सीधे जांच के आदेश जारी कर दिए। न्यायालय ने साइबर क्राइम पुलिस को निर्देश दिया है कि वह सभी आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही रजिस्ट्रार/संबंधित प्राधिकारी को भी निर्देशित किया गया है कि वह सभी पक्षों को सुनकर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
कोर्ट ने रजिस्ट्रार को भी दिए निर्देश
कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही दिनांक 24.05.2026 के Annexure-P/11 के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराकर रजिस्ट्रार से संपर्क कर लिया है। इसलिए रजिस्ट्रार को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर विस्तृत जांच करें और उक्त चुनाव से संबंधित सभी संबंधित पक्षों की सुनवाई करने के बाद एक विस्तृत निष्कर्ष सहित अपनी रिपोर्ट, 15 दिनों की अवधि के भीतर, निश्चित रूप से इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। यह भी निर्देश दिया जाता है कि चूंकि याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायतों के संबंध में पुलिस अधीक्षक, साइबर सेल के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई है। इसलिए पुलिस अधीक्षक, साइबर सेल को भी निर्देश दिया जाता है कि वे आज से 15 दिनों की अवधि के भीतर, निश्चित रूप से एक सीलबंद लिफाफे में, अपनी रिपोर्ट इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
चुनावों पर नहीं लगाई रोक
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि हम चुनावों पर रोक लगाने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि चुनावों की घोषणा 21.05.2026 को हो चुकी है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाता है कि निर्वाचित निकाय कार्य कर सकता है, लेकिन अगली सुनवाई की तारीख तक कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं लेगा।


