बीजेपी सबसे अमीर पार्टी

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बीजेपी सबसे अमीर पार्टी

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एडीआर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि छह राजनीतिक दलों ने साल 2022-23 की अपनी आय घोषित कर दी है. जो 3077 करोड़ रुपये है. इसमें से लगभग 2361 करोड़ रुपये बीजेपी की आय है. एडीआर के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में छह राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 76.7 फीसदी हिस्सेदारी बीजेपी की है.

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कांग्रेस ने 452.375 करोड़ रुपये की आय घोषित की है जो इस फेहरिस्त में दूसरे पायदान पर है. ये राशि छह दलों की कुल आय का 14.70 फीसदी है.कांग्रेस के अलावा बीएसपी, आम आदमी पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी और सीपीआई(एम) ने अपनी आय घोषित की है.एडीआर के अनुसार वित्तीय साल 2021-22 और 2022-23 के बीच बीजेपी की आय में काफी इजाफा हुआ है. साल 2021-22 में पार्टी की आय 1917.12 करोड़ थी जो 2022-23 में बढ़कर 2360.844 करोड़ हो गई.इसी तरह आम आदमी पार्टी की आय साल 2021-22 में 44.53 करोड़ रुपये से बढ़ कर 2022-23 में 85.17 करोड़ हो गई जो 91.23 फीसदी का उछाल है.

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कांग्रेस ने बताया है कि उसकी आय 452.375 करोड़ थी लेकिन कुल खर्च 467.135 करोड़ रहा.वहीं बीजेपी ने बताया कि उसकी आमदनी 2022-23 में 2360.844 करोड़ रुपये थी लेकिन खर्च 1361.684 करोड़ रुपये है.

Abhilash Shukla (Editor)
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Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन बिल पर शनिवार रात 8.30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। इसमें उन्होंने विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो पाप विपक्ष ने किया है, उसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी। ये देश के नारी शक्ति के अपराधी हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं। पीएम मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। मैं सभी माताओं-बहनों से इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं। हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सबकुछ हो जाता है, तो दलहित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नागरिक शक्ति को भुगतना पड़ा। संसद में तालियां बजा रही थीं परिवारवादी पार्टियां कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी। मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ कि नारी हित का प्रस्ताव गिरा तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर ये लोग मेजे थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वह केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वह नारी के आत्म सम्मान पर चोट थी। नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती। इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी तो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था। जिन दलों ने विरोध किया उनसे मैं दो टूक कहूंगा-ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्राटेंड ले रहे हैं वे यह भूल रहे हैं कि 21 वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है। वह उनकी मंशा भांप रही है और सच्चाई भी भली-भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण का विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी।  इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का अपमान किया है। जनता द्वारा इसकी सजा से वे बच नहीं पाएंगे। साथियों, संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से कुछ छीनने का नहीं था। हर किसी को कुछ न कुछ देने का था। अपना असली चेहरा सामने ला दिया है पीएम मोदी ने कहा कि इन दलों ने नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। मुझे लगा कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी। अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने महिलाओं के पक्ष में रहने का अवसर खो दिया। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों की पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए, लेकिन कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े। इसीलिए कांग्रेस ने इसमें संशोधन न करवाकर अनेक क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक भविष्य को अंधेरे की ओर ढकेला है। विरोध की एक बड़ी वजह इन परिवारवादी पार्टियों का डर है। अगर महिलाएं सशक्त  हो गईं तो इन परिवारवादी पार्टियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। कांग्रेस ने दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी कांग्रेस ने बांटो और राज करो की नीति विरासत में लेकर आई है। इसीलिए वह दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा देती है। हमने स्पष्ट किया किया था सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए। यह सभी राज्यों और दलों के लिए अवसर था। यह बिल पास होता तो तमिलनाडु, केरल, यूपी सभी राज्यों की सीटें बढ़तीं। इन दलों ने अपने राज्यों के लोगों को भी धोखा दे दिया।