तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बयानों के क्या हैं मायने, उग्र हिन्दुत्व के ट्रैक पर फिर से भाजपा!

Date:

भाजपा उग्र हिन्दुत्व के कारण ही सत्ता में आई थी। वह जमाना याद कीजिए जब लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली थी। इसके बाद अयोध्या में जो कुछ हुआ, उसने भाजपा को दो सीटों से तीन अंकों के आंकड़े तक पहुंचाया। भाजपा जब सत्ता में आई तो अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने एक अलग रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आई। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ की बात हुई, लेकिन एनडीए के अन्य दलों को साथ लेकर चलने की कोशिश भी जारी रही।

हाल ही में भाजपा के कुछ मुख्यमंत्रियों के ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनसे लगता है कि पार्टी फिर से अपनी लाइन बदल रही है। ऐसे बयानों में सबसे आगे हैं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ। उन्होंने लोकसभा चुनाव में भी उपने उग्र हिन्दुवादी छवि को बरकरार रखा। यूपी में सीटें कम हुईं और माना यह गया कि योगी के भाषण और छवि ने ही सपा को आगे बढ़ने का मौका दिया। इसके बाद भी योगी नहीं माने और न ही उन्हें रोकने की कोई कोशिश हुई। अभी हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने आगरा में बांग्लादेश के संदर्भ में एक बयान दिया था, जिस पर जमकर बवाल मचा था। योगी ने कहा था-बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो नेक रहोगे, सुरक्षित रहोगे।

इसके बाद मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव ने जन्माष्टमी पर एक बयान दिया। अशोक नगर जिले के चंदेरी में एक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे डॉ. यादव ने कहा था कि जो यहां का खाता है और कहीं और का बजाता है, यह नहीं चलेगा। भारत के अंदर रहना होगा तो रामकृष्ण की जय कहना होगा। इसके बाहर कुछ नहीं चले। हमारे देश के भीतर हम सब का सम्मान करना चाहते हैं, किसी का अपमान नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा हर किसी को अपनी पूजापद्धति की स्वतंत्रता है, लेकिन देशभक्ति जरूरी है। इस बयान के भी अपने-अपने तरीके से राजनीतिक अर्थ लगाए गए।

वर्तमान में जो सबसे गरम मुद्दा चल रहा है वह है असम का। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को नमाज के लिए मिलने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया है। इस फैसले की जहां विपक्षी पार्टियां आलोचना कर रहीं, वहीं एनडीए में भी खटपट मच गई है। जदयू और एलजेपी ने इस फैसले का विरोध किया है, लेकिन इसके बाद भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से कोई सफाई सामने नहीं आई है।

इन सब बयानों के बीच मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी एक बयान सामने आया था। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा था कि वहां रेप जैसी घटनाएं होती हैं। भाजपा आलाकमान ने तत्काल उन्हें चेताया। यहां तक कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने उन्हें तलब कर आइंदा ऐसे बयान न देने की चेतावनी दी, लेकिन योगी आदित्यनाथ, डॉ.मोहन यादव और हेमंत बिस्वा सरमा के बयानों पर ऐसी कोई पहल शीर्ष नेतृत्व द्वारा नहीं की गई।

ऐसे में क्या माना जाए…क्या भाजपा फिर से उग्र हिन्दुत्व के ट्रैक पर आना चाहती है या फिर मिलीजुली कुश्ती चलने देने की कोशिश कर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

इंदौर। डेली कॉलेज के संविधान बदलने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बताया जाता है कि डीसी बोर्ड ने बाले-बाले संविधान बदलकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी शिकायत लेकर ओल्ड डेलियंस कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंचे। कलेक्टर ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को इसकी जांच सौंपी है। ओल्ड डेलियंस ने मंगलवार को कलेक्टर शिवम वर्मा को एक प्रतिवेदन सौंपा। इसमें कहा गया है कि  डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा अपंजीकृत एवं अप्रस्वीकृत संशोधनों के आधार पर अवैध रूप से चुनाव कराए जा रहे हैं।   प्रतिवेदन में कहा गया है सोसायटी का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तथा नियम/विनियम, जो 08 अप्रैल 1954 को निर्मित हुए थे और आज भी लागू हैं। यह स्पष्ट रूप से  निर्धारित करते हैं कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किस प्रकार होगा तथा उसके चुनाव किस प्रकार संपन्न किए जाएंगे। प्रतिवेदन में कहा गया है कि नियम के अनुसार नए बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया बोर्ड की अवधि समाप्त होने से कम से कम 90 दिन पूर्व अर्थात 12 सितंबर 2025 तक प्रारंभ हो जानी चाहिए, जो नहीं हए। सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं हुए संशोधन प्रतिवेदन में कहा गया है कि मध्यप्रदेश   सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1973 की धारा 10 के अनुसार, “प्रस्तावित” संशोधन केवल तभी प्रभाव में आ सकते हैं जब उन्हें रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण के माध्यम से अनुमोदित किया जाए। डेली कॉलेज के प्रस्तावित संशोधन दिनांक 5 मार्च 26, जिसे 9 अप्रैल 26 को प्रस्तुत किया गया, अभी तक सरकार द्वारा “अनुमोदित” नहीं किए गए हैं। ऐसी स्थिति में इन अप्रमाणित संशोधनों के आधार पर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं? इससे पहले संशोधन नहीं करने के हुए थे आदेश प्रतिवेदन में कहा गया है कि ऐसे संशोधनों को किसी भी स्थिति में अनुमोदित नहीं भी किया जा सकता, क्योंकि रजिस्ट्रार के दिनांक 10.11.25 के आदेश के अनुसार, डेली कॉलेज बैठकों का आयोजन तो कर सकता है, परंतु कोई “संशोधन” नहीं कर सकता, जब तक भोपाल स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में उनके अपीलों के सुनवाई नहीं हो जाती। डेली कॉलेज ने इस सारे तथ्यों को छुपाया है। कलेक्टर ने एडीएम से तुरंत जांच को कहा ओल्ड डेलियंस के प्रतिवेदन पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पिछले वर्ष जब कलेक्टर के पास संविधान संशोधन की शिकायत पहुंची थी तो उन्होंने उप रजिस्ट्रार को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद उप रजिस्ट्रार ने डेली कॉलेज को आदेश दिया था कि जब भोपाल में रजिस्ट्रार के यहां लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक संविधान संशोधन नहीं किया जाए।