मोहन सरकार में सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, तबादला सूची पर दिख रही सीएस अनुराग जैन की कसावट

Date:

भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने सोमवार देर रात अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। सीएस बनते-बनते रह गए राजेश राजौरा को छोड़कर सीएम सचिवालय में कोई प्रमुख अफसर नहीं बचा। दोनों प्रमुख सचिव संजय कुमार शुक्ला और राघवेंद्र कुमार सिंह अब अलगअलग विभागों के प्रमुख सचिव होंगे। इस सूची की खास बात यह है कि इसमें लूप लाइन में पड़े कई अफसरों को अच्छी पोस्टिंग मिली है, वहीं कई अफसरों को अच्छे विभागों से हटा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि जब से मुख्य सचिव के पद पर अनुराग जैन की नियुक्ति हुई है, तब से यह तय माना जा रहा था कि जल्द ही बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल होगी। झारखंड चुनाव प्रचार से लौटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तबादला सूची को अंतिम रूप दिया। बताया जा रहा है कि इस सूची में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा का हस्तक्षेप भी शामिल है। मुख्यमंत्री कार्यालय में कोई प्रमुख सचिव नहीं रह गया है। अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव से ऊर्जा विभाग वापस ले लिया गया है। वे नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के साथसाथ खेल एवं युवक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे।

शुक्ल का नगरीय प्रशासन में जाना चर्चा में

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में काम कर रहे संजय कुमार शुक्ल को इस पद से हटाने के बाद नगरीय विकास और आवास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे इसके अलावा पूर्व में सौंपे गए विभाग संभालते रहेंगे। शुक्ल को आयुक्त हाउसिंग बोर्ड का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शुक्ल का नगरीय प्रशासन विभाग में भेजा जाना चर्चा का विषय है। कहा जाता है कि उस विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से उनकी नहीं बनती। यह भी चर्चा है कि सीएम ने उस विभाग पर अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए शुक्ल की वहां तैनाती करवाई है। वहीं, राघवेंद्र सिंह से लोक सेवा प्रबंधन विभाग ले लिया गया है और प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के साथ प्रमुख सचिव एमएसएमई का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

मनीष सिंह के जिम्मे अब परिवहन विभाग

इस सूची के नामों में सबसे ज्यादा चर्चा मनीष सिंह की है। मप्र गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त मनीष सिंह को परिवहन विभाग का अपर सचिव, मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का प्रबंध संचालक तथा इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी भोपाल का कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह पंचायत राज के संचालक और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मनोज पुष्प को सहकारिता संस्थाएं मप्र भोपाल का वि... सह आयुक्त, सह पंजीयक बनाया गया है।

बामरा को भारी पड़ी सीएम की नाराजगी

गुलशन बामरा को अब प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग बनाया गया है। पिछले महीने सीएम मोहन यादव की बैठक में नाराजगी के चलते उन्हें प्रमुख सचिव पशुपालन से हटा दिया गया था। जनजातीय कार्य विभाग एसीएस नीरज मंडलोई से नगरीय विकास और आवास विभाग वापस लेते हुए उन्हें अपर मुख्य सचिव ऊर्जा और एमडी पावर मैंनेजमेंट कंपनी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, मनु श्रीवास्तव से ऊर्जा विभाग वापस लेते हुए उन्हें खेल और युवा कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

आपको याद होगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अमित शाह को क्या कहा था? प्रियंका ने कहा था-गृह मंत्रीजी हंस रहे हैं। सारी तैयारी पहले से कर ली है। चाणक्य भी जिंदा होते तो आश्चर्य में पड़ जाते। प्रियंका के कहने का मतलब था कि पूरा विपक्ष आपकी चालाकी को समझ चुका है। और हुआ यही, इस बार विपक्ष ने चाणक्य की चालाकी चलने नहीं दी। भले ही विपक्ष भाजपा पर इस बिल के माध्यम से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का आरोप लगा रही है, लेकिन हम नहीं मानते। इसके बावजूद विपक्ष ही नहीं आम जनता के मन में यह सवाल है कि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस बिल को लाने की क्या जरूरत थी? चलो यह भी मान लिया कि बिल लाना जरूरी था, फिर पूरे देश में नारी शक्ति वंदन कैंपेन क्यों चलाया जा रहा था। भाजपा हर जिले, गांव-कस्बे में यह आयोजन कर रही थी और सारे वरिष्ठ नेता नारी शक्ति बिल का गुणगान कर रहे थे। चुनाव सभाओं में भी इसका जमकर इस्तेमाल किया गया। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा था कि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में ही पारित हो चुका है, फिर इसकी जरूरत क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक फुल कॉन्फिडेंस में थे कि इस बार यह बिल जरूर पास होगा। जब सारे हथियार फेल हो गए तो पीएम मोदी ने बिल पर मतदान से पहले एक अपील की-मैं सभी सांसदों से कहूंगा... आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...। आप में से बहुतों को याद होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह ने मंडल कमीशन के समय भी संसद में ऐसी ही अपील की थी, लेकिन विपक्ष सरकार की मंशा को समझ गया था और सरकार की हार हुई थी। आपने महिला आरक्षण बिल की शर्त में लिखा कि आरक्षण तभी लागू होगा जब अगली जनगणना और उसके बाद सीटों का 'परिसीमन' होगा। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन करके एक राजनीतिक साजिश रचने की कोशिश कर रही है। माना कि आप राजनीति के चाणक्य हैं, लेकिन यह भी सच है कि चाणक्य दोबारा पैदा नहीं हो सकते… और यह भी सच है कि अगर आप चाणक्य जैसे भी होते तो इस बिल के गुब्बारे में इतनी हवा नहीं भरते…