इंदौर से उठी पूरी दुनिया के लिए टेरर फंडिंग और साइबर क्राइम को लेकर आवाज, यूरेशियन ग्रुप ने बनाई रणनीति

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इंदौर। इंदौर में यूरेशियन समूह की पांच दिवसीय बैठक का शुक्रवार को आखिरी दिन था। इस बैठक में मनी लॉड्रिंग, टेरर फंडिंग और साइबर क्राइम को लेकर चर्चा की गई और इसमें भारत के पहल की सभी सदस्य देशों ने सराहना की। इंदौर की इस बैठक में सीमा पार से टेरर फंडिंग तथा साइबर क्राइम को लेकर पूरी दुनिया के लिए आवाज उठाई गई। यह तय हुआ कि सभी सदस्य देश मिलकर इससे निजात पाने का उपाय निकालेंगे।

ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में यूरेशियन समूह के निदेशक यूरी चिखानचिन की अध्यक्षता में यूरेशियन देशों की बैठक में कई बिंदुओं पर सहमति बनी है। इसमें क्रॉस बॉर्डर फाइनेंसिंग और टेरर फंडिंग की रेगुलर मॉनिटरिंग के लिए रणनीति तैयार की गई है। इसके अलावा विभिन्न देशों के बीच फाइनेंशियल इंटेलिजेंस की शेयरिंग और प्रभावी कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हुई है। इस तरह के अपराधों की अब सतत मॉनिटरिंग होगी, जिसकी रिपोर्ट हर प्लेनेटरी बैठक में सार्वजनिक होगी।

आतंकी संगठनों की भी हुई बात

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अलकायदा, लश्करतैयबा, जैशमोहम्मद जैसे संगठन देश में सक्रिय हैं और उनसे जुड़े आतंकवादियों को दूसरे देशों से फंडिंग होती है। फंडिंग के कई सबूत भारत के पास हैं। यूरेशियन समूह के सदस्य देशों ने भरोसा दिलाया कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर सभी मिलकर काम करेंगे। बैठक में मूल्यांकन रिपोर्ट की समीक्षा की गई और उसे मंजूरी दी गई।

क्रिप्टो करेंसी को लेकर सभी देशों ने जताई चिन्ता

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि सदस्य देशों को आपसी सहयोग भी दिया जाएगा। बैठक में इस वर्ष मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों की समीक्षा की गई। सदस्य देशों को बताया गया कि क्रिप्टो करेंसी और फर्जी नामों से अकाउंट खोलकर आतंकी फंडिंग की जा रही है। टेरर फंडिंग में अक्सर विदेशी सहित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजर्स और क्रिप्टो वॉलेट शामिल होते हैं। उनकी जांच के लिए सामूहिक रूप से निगरानी करने की जरूरत है। अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न देशों के अनुभव और आगे चलकर इसके नियंत्रण के क्या तरीके हो सकते हैं, इस पर विचार कर रणनीति तैयार की गई है। ऐसे मामलों में वित्तीय कार्यबल किस प्रकार कार्रवाई करें इस पर भी योजना तैयार की गई है। इसके अलावा एशियाई देशों के अलावा विभिन्न अरब देशों को टेरर फाइनेंसिंग और फंडिंग रोकने के लिए किस तरह के टेक्निकल असिस्टेंट की जरूरत है, इस पर भी बात हुई है। ऐसे देशों को सहयोग किया जाएगा।

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