गुजरात उप चुनाव में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोहिल ने दिया इस्तीफा, शैलेश परमार को अध्यक्ष की जिम्मेदारी

Date:

नई दिल्ली। गुजरात में कडी और विसावदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में करारी हार के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने पद से इस्तीफा दे दिया है। गोहिल की जगह अहमदाबाद के दानिलिमदा सीट से विधायक शैलेश परमार अब प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान संभालेंगे।

इस्तीफे के बाद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि मुझे भारत की सबसे पुरानी और बेशक, भारत की सबसे अच्छी राजनीतिक पार्टी का अनुशासित सिपाही होने पर बहुत गर्व है। मैंने कड़ी मेहनत की है और हमेशा अपनी पार्टी को सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। दुर्भाग्य से हम आज सफल नहीं हुए। हम विसावदर और कडी उपचुनाव हार गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, हमारे दूरदर्शी नेता राहुल गांधी, महासचिव, संगठन, वेणुगोपाल और बेशक हमारे गतिशील गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक से प्राप्त निरंतर समर्थन और सहयोग की सराहना करता हूं।

गोहिल ने एक्स पर लिखा कि राजीव गांधी और सोनिया गांधी का मार्गदर्शन मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद रहा है जिसने मुझे एक व्यक्ति और जनसेवक के रूप में आकार दिया है और मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा। राज्यसभा के सदस्य गोहिल ने कहा क हमारी कांग्रेस पार्टी और इसकी गौरवशाली परंपरा की सच्ची भावना में, मैंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है और कुछ घंटों पहले गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है।

एक सीट पर आप और दूसरी पर भाजपा

विसावदर उप-चुनाव में आप के गोपाल इटालिया ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। इटालिया को 75942 वोट मिले, वहीं बीजेपी के किरीट पटेल को 58388 वोट मिले। कांग्रेस के नितिन रणपरिया को 5501 वोट मिले। कडी से बीजेपी के उम्मीदवार राजेंद्र चावड़ा ने जीत दर्ज की। उन्हें 99742 वोट मिले। कांग्रेस के रमेश चावड़ा को 60290 वोट मिले, वहीं आप के जगदीश चावड़ा को 3090 वोट मिले।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

इंदौर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के इंदौर अध्यक्ष पद के लिए खींचतान चल रही है। दावेदार पैसे से लेकर पहुंच तक का जोर आजमा रहे हैं। ऐसा शायद पहली बार ही हुआ है कि पद के लिए महंगे गिफ्ट से लकर कई तरह के खर्चे उठाने की बात सामने आई है। ऐसे में आम कार्यकर्ता के मन में यह भी सवाल है कि इस बार क्या पार्टी उन्हें तवज्जो देगी या फिर बड़े नेताओं की मनमानी ही चलेगी। भाजयुमो अध्यक्ष चुनाव में पैसा और पहुंच फैक्टर के अलावा इस बात की भी चर्चा हो रही है कि आखिर किस विधानसभा क्षेत्र का नंबर आने वाला है। पिछली दो बार से राऊ विधानसभा का ही नंबर आ रहा है। पहले मनस्वी पाटीदार और फिर सौगात मिश्रा। इस हिसाब से इस बार राऊ का नंबर आना मुश्किल है, लेकिन सवाल यह भी है कि इस घमासान में आखिर कौन विधायक अपने समर्थक को यह पद दिलाने में सफल हो पाता है। ब्राह्मण दावेदार को मिल सकती है निराशा पिछली बार ब्राह्मण समाज से सौगात मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया था। अभी वर्तमान में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ब्राह्मण हैं। दावेदारों में ब्राह्मणों की संख्या भी कम नहीं है, लेकिन पार्टी में चर्चा है कि संगठन दो-दो पद एक ही जाति को देने पर राजी नहीं होगा। ऐसे में इस बार ब्राह्मण दावेदारों को निराश होना पड़ सकता है। प्रदेश में एक नंबर से पांच पदाधिकारी हाल ही में भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने अपनी प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की थी। इसमें सबसे ज्यादा पदाधिकारी विधानसभा एक से बने। तीन नंबर विधानसभा से एक पदाधिकारी और चार नम्बर से एक पदाधिकारी शामिल है। ऐसे में इंदौर अध्यक्ष पद शायद ही विधानसभा एक के खाते में जाए। विधानसभावार इन नामों की चर्चा वर्तमान में जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें विधानसभा एक में अमित पालीवाल और सागर तिवारी के नाम शामिल हैं। दो नंबर विधानसभा से रोहित चौधरी, निक्की राय और अक्षत चौधरी का नाम है। तीन नंबर विधानसभा से आवेश राठौर का नाम है, जबकि चार नंबर से मयूरेश पिंगले, नयन दुबे और शुभेंद्र गौड़ के नामों की चर्चा है। कई नामों पर चल रहा विवाद वर्तमान में जिन नामों की चर्चा है, उनमें से कई को लेकर विवाद है। अमित पालीवाल पर धोखाधड़ी का केस दर्ज है। अक्षत चौधरी पहले ही विवादों में हैं, जिसकी शिकायत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक पहुंच चुकी है। चौधरी पार्टी के नए धन्ना सेठ माने जाते हैं और आए दिन आयोजनों पर खूब पैसे लुटा रहे हैं। इन दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के खास माने जाने वाले जीतू जिराती के खेमे में जमा हो गए चौधरी ने प्रदेश कार्यकारिणी के लिए भी कोशिश की थी, लेकिन शिकायतों के बाद इससे बाहर रहे। नाम भेजने में होगा जमकर खेला भाजपा के सत्र बताते हैं कि जो ट्रेंड अभी चल रहा है, उसके हिसाब से इस बार स्थानीय स्तर पर नाम भेजने में भी जमकर खेला होगा। सारे दावेदार होर्डिंग से लेकर आयोजनों तक में जमकर पैसा लगा रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ बड़े पदाधिकारियों के यात्रा और होटल के खर्चे उठाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नाम भेजने में कौन सा फैक्टर काम करेगा, कहा नहीं जा सकता।