पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल लगातार महंगा बना रहा तो अगले 2-3 हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दाम 5 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। तेल कंपनियों पर बढ़ते घाटे ने सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है।
Petrol Diesel Price Hike की आशंका क्यों बढ़ी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान-अमेरिका और पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
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भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़ने पर घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
पेट्रोल-डीजल 10 रुपये तक महंगा होगा?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेल कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना 700 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
* शुरुआती बढ़ोतरी 3-5 रुपये प्रति लीटर हो सकती है
* अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहा तो बढ़ोतरी 8-10 रुपये तक पहुंच सकती है
* सरकार टैक्स में राहत देकर असर कम करने की कोशिश कर सकती है
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं हुई है।
Oil Companies पर कितना बढ़ा दबाव?
इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां लंबे समय से कीमतें स्थिर रखे हुए हैं। लेकिन बढ़ती आयात लागत ने कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
* कंपनियों की मासिक अंडर-रिकवरी 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है
* डीजल पर सबसे ज्यादा दबाव है क्योंकि इसका उपयोग ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अधिक होता है
* ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है
आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर Petrol Diesel Price Hike होती है तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
संभावित असर:
* ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा
* खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं
* ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं के किराए बढ़ सकते हैं
* बस और ट्रक ऑपरेटर्स फ्रेट चार्ज बढ़ा सकते हैं
विशेषज्ञ मानते हैं कि डीजल महंगा होने से सबसे ज्यादा असर लॉजिस्टिक्स और कृषि क्षेत्र पर पड़ता है।
सरकार क्या कदम उठा सकती है?
सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि केंद्र सरकार रणनीतिक तेल भंडार और टैक्स एडजस्टमेंट जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।
इसके अलावा:
* एक्साइज ड्यूटी में कटौती संभव
* तेल कंपनियों को राहत पैकेज मिल सकता है
* चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं
हालांकि, अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई आधिकारिक बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की तेजी और तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे ने आने वाले हफ्तों में Fuel Price Hike की संभावना बढ़ा दी है। अगर वैश्विक तनाव जारी रहा तो पेट्रोल और डीजल 5 से 10 रुपये तक महंगे हो सकते हैं। आम लोगों को आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।



