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ताइवान के चारों ओर चीन का शक्ति प्रदर्शन तेज जस्टिस मिशन 2025’ से बढ़ा तनाव, मिसाइलें और रॉकेट पहले से ज्यादा करीब गिरे
चीन और ताइवान के बीच सीमा पर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चीन का विशाल सैन्य अभ्यास ‘जस्टिस मिशन 2025’ है, जिसके तहत ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर लाइव-फायर ड्रिल की जा रही है। इस अभ्यास के चलते ताइवान जलडमरूमध्य एक बार फिर युद्ध जैसे माहौल की आहट से गूंज उठा है। आज इस सैन्य अभियान का तीसरा दिन है और तनाव अब भी बरकरार है।
इस अभ्यास में चीन की वायुसेना, नौसेना और मिसाइल इकाइयों ने मिलकर ताकत का प्रदर्शन किया। ताइवान के अधिकारियों के अनुसार, इस बार चीनी मिसाइलें और रॉकेट पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ताइवान के करीब गिरे, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अभ्यास के दौरान 27 रॉकेट ताइवान के पास आकर गिरे, जो पहले की तुलना में बेहद नजदीक थे।
चीन का कहना है कि यह सैन्य अभ्यास ताइवान को समर्थन देने वाली बाहरी ताकतों के लिए चेतावनी है। चीन के सरकारी मीडिया में इसे साफ संदेश बताया गया कि ताइवान को चीन से अलग करने की किसी भी कोशिश का वह पूरी ताकत से जवाब देगा। अभ्यास में डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट युद्धपोत, फाइटर जेट, बॉम्बर, लॉन्ग-रेंज मिसाइलें और जमीनी बलों के लाइव-फायर अभ्यास शामिल हैं। इसके साथ ही ताइवान के उत्तर और दक्षिणी जलडमरूमध्य क्षेत्रों में जमीनी और हवाई हमलों का भी अभ्यास किया गया।
इस सैन्य गतिविधि का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी भी प्रभावित हुई है। ताइवान की नागरिक विमानन सेवा ने जलडमरूमध्य के आसपास सात खतरनाक जोन बनाए जाने की जानकारी दी। चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की लगभग 150 उड़ानों के समय में बदलाव किया गया, जबकि सिर्फ एक दिन में 941 उड़ानें देरी या रद्द हुईं।
चीन के अभ्यास से मछुआरों की रोजमर्रा की आजीविका पर भी असर पड़ा है। मछली पकड़ने का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ और मछुआरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
वहीं, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा कि ताइवान न तो संघर्ष बढ़ाएगा और न ही किसी तरह का उकसावा देगा, लेकिन उन्होंने चीन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। राष्ट्रपति ने बताया कि ताइवान ने चीन के करीब 130 सैन्य विमानों और 14 युद्धपोतों को ट्रैक किया है, जबकि लगभग 90 चीनी विमान ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा पार कर चुके हैं। उनके मुताबिक, चीन का मकसद ताइवान की जनता का मनोबल तोड़ना और सरकार पर दबाव बनाना है।
कुल मिलाकर, ‘जस्टिस मिशन 2025’ ने ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हालात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।



