ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते पर आखिरकार ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। गुरुवार को जारी एक लिखित संदेश में उन्होंने खुलासा किया कि इस समझौते को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय अलग थी, लेकिन देशहित को देखते हुए उन्होंने इसे मंजूरी दे दी।
मोजतबा खामेनेई ने कहा, “इस समझौते पर मेरी राय अलग थी। लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुझे भरोसा दिलाया कि वे ईरानी जनता और विरोधी ताकतों के खिलाफ खड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे। इसी भरोसे पर मैंने इसकी अनुमति दी।”
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उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया था कि यदि अमेरिकी पक्ष अत्यधिक या अनुचित मांगें रखेगा, तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा।
अपने संदेश में खामेनेई ने कहा, “अब हम सभी इन शर्तों के पूरी तरह लागू होने का इंतजार करेंगे।” यही नहीं, उन्होंने पहली बार ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच सीधे संवाद की अनुमति देने का संकेत भी दिया है।
यह बयान कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मार्च में सुप्रीम लीडर का पद संभालने के बाद यह पहली बार है जब मोजतबा खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।
गौरतलब है कि उनके पिता, पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei, की फरवरी में हुए अमेरिका-इजराइल हमले में मौत की खबरों के बाद ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। अब इस नए समझौते और मोजतबा खामेनेई के रुख को मध्य-पूर्व की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल Iran-US Relations बल्कि पूरे Middle East की रणनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
क्या मोजतबा खामेनेई का यह फैसला ईरान और अमेरिका के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत है, या भविष्य में फिर से तनाव बढ़ सकता है?
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