पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान ने एक दो-चरणीय शांति प्रस्ताव भेजकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिससे अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि पहले होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा या परमाणु बातचीत शुरू होगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान और ओमान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान की योजना में सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने पर जोर दिया गया है, जबकि परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को बाद के चरण में रखने की बात कही गई है।
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प्रस्ताव के पहले चरण में ईरान ने अमेरिका से नाकेबंदी खत्म करने और जलडमरूमध्य को फिर से चालू करने की मांग की है। दूसरे चरण में युद्धविराम या स्थायी शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इसके बाद ही परमाणु मुद्दे पर औपचारिक वार्ता शुरू करने की बात कही गई है।
इस पूरी प्रक्रिया में रूस, ओमान और पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका अभी इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और उसकी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने ईरान के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोकना, मौजूदा परमाणु सामग्री को देश से बाहर भेजना और मिसाइल कार्यक्रम के साथ क्षेत्रीय समूहों को समर्थन बंद करना शामिल है। अमेरिकी नीति के अनुसार, ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत ठप पड़ती नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधियों की पाकिस्तान यात्रा रद्द होने से संकेत मिला है कि वॉशिंगटन ईरान के शुरुआती प्रस्ताव से सहमत नहीं है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी माना है कि देश के भीतर इस मुद्दे पर अभी एकमत नहीं बन पाया है।
बढ़ते मतभेद और जटिल होते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि शांति की राह फिलहाल आसान नहीं है और दुनिया की नजर अब अगले कदम पर टिकी हुई है।



