इंदौर। मध्यप्रदेश के निगम-मंडल-प्राधिकरण-आयोग में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के पदों पर नाम तय नहीं हो पा रहे। इसका कारण इंदौर के भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान बताई जा रही है। इन नियुक्तियों में सबसे बड़ा रोड़ा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बन रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मंत्रीजी शुरू से ही अपने खास समर्थक हरिनारायण यादव को आईडीए अध्यक्ष बनवाने की इच्छा रखते हैं। इसके लिए लगातार कोशिश भी जारी है और कई तरह की रणनीति भी बनाई जाती रही है। बीच में हरिनारायण यादव की आईडीए में नियुक्ति हुई भी, लेकिन उपाध्यक्ष पद ही मिल पाया। इससे यादव काफी नाराज हुए थे और फिर मंत्रीजी पर नियुक्ति के लिए दबाव बनाया था। इसके बाद मंत्रीजी यादव को अध्यक्ष बनाने की कोशिश में जुट गए।
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यादव के समर्थन के लिए भी बना ली टीम
मंत्रीजी ने हरिनारायण यादव को सीएम के करीब लाने की रणनीति भी बनाई। इसी का नतीजा निकला कि कुछ समय पहले हरिनारायण यादव के सीएम डॉ.मोहन यादव के रिश्तेदार होने की खबरें भी आईं। अब मंत्रीजी ने यादव सहित अपने अन्य समर्थकों के सपोर्ट के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की टीम बना ली है।
कांग्रेस से भाजपा में आए समर्थक पर भी जोर
मंत्रीजी ने अपने समर्थन में एक टीम खड़ा करने के बाद उपाध्यक्ष के दोनों पदों के साथ ही संचालक के पद पर भी अपने समर्थक को लाने की कोशिश में जुट गए। सूत्र बताते हैं कि मंत्रीजी के कहने से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उम्मीदवार विहीन करने वाले अक्षय कांति बम से उपाध्यक्ष पद का वादा किया गया है। पिछले दिनों मंत्रीजी ने बम के लिए दिल्ली में बड़ी जमावट भी लगाई थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलवा दिया और बम के कार्यक्रम में ओम बिरला को भी बुलवा लिया।
अन्य पदों पर कब्जे की कोशिश
मंत्रीजी चाहते हैं कि अध्यक्ष के अलावा दोनों उपाध्यक्ष के पदों पर भी उनके समर्थक ही आएं। एक नाम तो अक्षय कांति बम का हो गया, अब दूसरा नाम दीपक जैन टीनू का तय किया गया है। टीनू जैन को पहले भाजपा नगर अध्यक्ष बनाने की कोशिश भी हुई थी। इसके साथ ही संचालक के एक पद पर मंत्रीजी अपने समर्थक चिंटू वर्मा की नियुक्ति कराना चाहते हैं, जिन्हें वे जिला अध्यक्ष का पद नहीं दिला पाए।
बाकी नेताओं ने अटकाया रोड़ा
इंदौर के बाकी नेताओं को जब मंत्रीजी की रणनीति का पता चला तो उन्होंने भी रोड़ा अटकाना शुरू कर दिया। भाजपा के नेताओं का कहना है कि क्या इसके अलावा इंदौर में और कोई विधायक या नेता नहीं है जो सारे पद एक ही गुट को दिए जा रहे हैं। बताया जाता है कि मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, मालिनी गौड़ से लेकर भाजपा की नई बनी चौकड़ी भी विरोध में उतर आई। सबका कहना है कि एक तो लंबे समय बाद नियुक्ति हो रही है, उस पर अगर सभी विधानसभा क्षेत्रों और नेताओं का ध्यान नहीं रखा गया तो इस नियुक्ति का क्या फायदा?
सीएम ऐसा होने नहीं देंगे
भाजपा नेताओं का कहना है कि सीएम डॉ.मोहन यादव इंदौर सहित पूरे प्रदेश में भाजपा में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में अगर मंत्रीजी की मंशा पूरी हो गई तो पूरा इंदौर ही असंतुलित हो जाएगा। नेताओं का कहना है कि अब तक प्रदेश में जहां भी ऐसी कोशिश हुई है, सीएम ने हस्तक्षेप किया है और संतुलन बनाया है। इस मामले में भी सीएम हस्तक्षेप करेंगे और ऐसी कोशिश सफल नहीं होगी।


