हर महीने एक शांति समझौता”! ट्रंप को नोबेल दिलाने की मुहिम तेज़, व्हाइट हाउस की धमाकेदार मांग
“अब और इंतज़ार नहीं!” – व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ज़ोरदार ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने का समय आ चुका है। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने केवल छह महीनों में छह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का पटाक्षेप कर “शांति के मसीहा” जैसी भूमिका निभाई है।
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प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने एक के बाद एक छह देशों के झगड़ों की लिस्ट गिनाई –
थाईलैंड-कंबोडिया, इसराइल-ईरान, रवांडा-कांगो, भारत-पाकिस्तान, सर्बिया-कोसोवो और मिस्र-इथियोपिया। उन्होंने कहा:
“ट्रंप ने हर महीने एक नया शांति करार कराया है। ऐसा रिकॉर्ड इतिहास में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं बनाया।”
“नोबेल अब या कभी नहीं!”
लेविट का कहना था कि ये केवल डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि एक “ग्लोबल गेम चेंजर” है। उन्होंने कहा कि ट्रंप को अब और नज़रअंदाज़ करना “शांति की तौहीन” होगी।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मच गई है। कुछ लोग इसे “व्हाइट हाउस की चुनावी रणनीति” मान रहे हैं, तो कुछ इसे ट्रंप की “नोबेल पाने की पुरानी तमन्ना” की पूर्ति की कोशिश बता रहे हैं।
ट्रंप के फैन क्लब में शामिल हुए नेतन्याहू और शरीफ़
गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू भी ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की सिफारिश कर चुके हैं। ट्रंप के समर्थकों के मुताबिक, यह तो “बस शुरुआत है”, आने वाले समय में वो “विश्व शांति के पोस्टर बॉय” बन सकते हैं।
अब देखना ये होगा कि क्या नोबेल कमेटी व्हाइट हाउस की इस मांग पर गौर करती है या ट्रंप को एक बार फिर सिर्फ़ उम्मीदों से ही संतोष करना पड़ेगा!



