लंदन में गांधी प्रतिमा से छेड़छाड़, भारतीय समुदाय में आक्रोश
गांधी जयंती से पहले लंदन के टेविस्टॉक स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आपत्तिजनक भित्तिचित्र पाए जाने से भारतीय समुदाय में गहरा आक्रोश फैल गया है। इस घटना पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अहिंसा और गांधी की विरासत पर हमला बताया है।
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भारतीय उच्चायोग की प्रतिक्रिया
- लंदन स्थित भारत के उच्चायोग ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
- बयान में कहा गया कि यह हरकत केवल एक मूर्ति के साथ नहीं, बल्कि गांधी जी की शिक्षाओं और अहिंसा की विचारधारा पर हमला है।
- भारतीय अधिकारियों ने मामले को स्थानीय प्रशासन और मेट्रोपॉलिटन पुलिस के संज्ञान में लाया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
- अधिकारी मौके पर पहुंचकर प्रतिमा की मरम्मत और गरिमा बहाल करने में जुटे हैं।
घटना का समय और महत्व
- घटना गांधी जयंती (2 अक्तूबर) से कुछ दिन पहले हुई है, जब हर साल इस स्थान पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
- इस बार तोड़फोड़ ने भारतीय समुदाय और वहां मौजूद लोगों को गहराई से आहत किया।
गांधी प्रतिमा का इतिहास
- यह कांस्य प्रतिमा 1968 में भारत लीग के सहयोग से स्थापित की गई थी।
- प्रतिमा गांधी जी को ध्यान मुद्रा में दर्शाती है और उनके लंदन प्रवास की याद दिलाती है, जब वे पास के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कानून की पढ़ाई कर रहे थे।
- प्रतिमा के नीचे लिखा है: “महात्मा गांधी, 1869–1948″।
- हर साल 2 अक्तूबर को यहां फूल अर्पित किए जाते हैं और गांधी जी के प्रिय भजन गाए जाते हैं।
- यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।


