नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने निमेस्लाइड की 100 एमजी से अधिक खुराक पर रोक लगा दी है। यह यह दर्द और बुखार में काम आती है। सरकार ने 100 एमजी से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड की ओरल दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत लिया गया है।
सरकार का कहना है कि इतनी अधिक मात्रा वाली यह दवा मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है और इसके सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। हेल्थ मिनिस्ट्री के नोटिफिकेशन के अनुसार, 100 एमजी से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड दवा इंसानों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। यह एक नॉन–स्टेरॉयडल एंटी–इंफ्लेमेटरी ड्रग है, जिसकी लिवर पर संभावित टॉक्सिसिटी और अन्य दुष्प्रभावों को लेकर दुनिया भर में जांच हो रही है। सरकार ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से सलाह लेने के बाद यह फैसला किया है। आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में तुरंत लागू होगा। कम डोज़ वाले फॉर्मूलेशन और अन्य सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध रहेंगे।
👉 यह भी पढ़ें:
- ATF Price Freeze Scheme: सरकार का बड़ा दांव! 3 साल तक नहीं बदलेगी जेट फ्यूल की कीमत, एयरलाइंस के लिए गेमचेंजर या नया जोखिम?
- लालू-राबड़ी ने लौटाई सरकारी सुरक्षा! बिहार की राजनीति में बड़ा बवाल, क्या शुरू हो गया है नया सियासी संघर्ष?
- Immigration Rules 2025: भारत सरकार ने बदले विदेशी नागरिकों के नियम! वीजा, रजिस्ट्रेशन और नागरिकता से जुड़े बड़े बदलाव लागू
- तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला: 14 लाख किसानों का 50 हजार तक का फसल लोन माफ
- केरल में कांग्रेस की नई सरकार का आगाज, वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की ली शपथ
- सोने के आयात पर सरकार का बड़ा शिकंजा, अब बिना शुल्क आने वाले सोने पर रहेगी कड़ी निगरानी
हेल्थ मिनिस्ट्री के एक नोटिफिकेशन में कहा गया कि 100 एमजी से ज्यादा निमेसुलाइड वाले सभी ओरल फॉर्मूलेशन, जो तुरंत रिलीज़ होने वाले डोज के रूप में होते हैं, इंसानों के लिए खतरा हो सकता है और इसके सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं। सरकार ने कहा है कि जनहित में यह कदम उठाया गया है ताकि लोगों की सेहत को किसी तरह का खतरा न हो। इससे पहले साल 2011 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों में निमेसुलाइड के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी साल जनवरी में सरकार ने पशुओं के लिए निमेसुलाइड की सभी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी थी।



