बिहार के रास्ते बंगाल में घुसने की कोशिश में भाजपा, इसीलिए लगाया युवा नितिन नबीन पर दांव, मोदी-शाह से नजदीकियां भी आईं काम

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इंदौर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए लंबे समय से कवायद चल रही थी। कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन नितिन नबीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर आलाकमान ने सबको चौंका दिया। इसे बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की बंपर जीत का पुरस्कार तो मान ही जा रहा है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा फैक्टर पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव है। इसके साथ ही भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं को अध्यक्ष पद सौंपने की परिपाटी भी बदलने की कोशिश की है।

बताया जाता है कि 14 जनवरी के बाद नितिन नवीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा हो सकती है। ऐसे में वे बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगले साल जनवरी में जब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे, तब उनकी उम्र केवल साढ़े 45 साल होगी। कायस्थ समुदाय से संबंध रखने वाले नितिन पांच बार के विधायक हैं। वर्तमान में वह बिहार में पथ निर्माण मंत्री और पटना के बांकीपुर से विधायक हैं। इस नियुक्ति को सामान्य नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह आने वाले चुनावी दौर की रणनीति का संकेत है।

युवाओं को नेतृत्व सौंपने की ओर अग्रसर भाजपा

नितिन नबीन की नियुक्ति से यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी की बागडोर अब युवाओं के हाथ होगी। इससे यह भी साफ है कि आनेवाले चुनावों में टिकट वितरण से लेकर संगठन के विभिन्न पदों पर भी युवाओं को मौका मिलेगा। इस नियुक्ति ने यह भी संदेश दिया है कि भाजपा अब अपना चेहरा युवा करना चाहती है।

बंगाल में छत्तीसगढ़ जैसे कमाल की उम्मीद

नितिन नबीन से भाजपा को बंगाल में छत्तीसढ़ जैसे चमत्कार की ही उम्मीद है। साल 2023 छत्तीसगढ़ में चुनाव होने थे। तब कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल लगभग अजेय माने जा रहे थे। इसी बीच भाजपा ने नितिन नबीन को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर उन्हें रायपुर भेजा। इसके बाद नितिन नबीन ने बड़ी ही कुशलता से चुनाव मैनेजमेंट शुरू किया। नबीन ने एसी कमरे के बजाए छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से लेकर दूर दराज के गांवों की खाक छानी। नितिन की रणनीति और मेहनत का ही परिणाम था कि छत्तीसगढ़ पर भाजपा का कब्जा हो गया। चूंकि बिहार का बंगाल से गहरा नाता है। वहां काफी संख्या में बिहार के मतदाता हैं। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि नबीन वहां भी छत्तीसगढ़ जैसा ही कमाल दिखा पाएंग।

नीतीश के बार-बार सीएम से हताश से नेता

बिहार में भाजपा लगातार दूसरी बार जदयू से ज्यादा सीट लेकर आई, लेकिन गठबंधन की मजबूरी के कारण नीतीश कुमार ही फिर से सीएम की कुर्सी पर बैठे। कहा जा रहा है कि इसके कारण बिहार के भाजपा नेता व कार्यकर्ता हताशा में थे। नबीन की नियुक्ति के पीछे एक वजह यह भी मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद भाजपा ने बिहार के नेताओं और कार्यकर्ताओं के नबीन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है वे हौसला बनाए रखें।

कायस्थ नेता की भाजपा में थी कमी

नितिन नवीन कायस्थ समाज से आते हैं। बिहार में इस समाज की आबादी भले ही एक प्रतिशत से कम हो, लेकिन यह भाजपा का पारंपरिक और भरोसेमंद मतदाता वर्ग रहा है। यशवंत सिन्हा के बाद इस समाज के किसी नेता को इतने ऊंचे संगठनात्मक पद पर जिम्मेदारी मिलना भी राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

लगातार पांच बार जीत दर्ज की

नितिन नवीन का राजनीतिक सफर पूरी तरह भाजपा के भीतर ही विकसित हुआ है। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। पिता के निधन के बाद उन्होंने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से राजनीति की कमान संभाली और वर्ष 2006 से लगातार पांच बार वहां से जीत दर्ज की।

पिता से अमित शाह के रहे अच्छे संबंध

नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा खुद पटना से 7 बार के विधायक थे। उनके असमय निधन के बाद नितिन नबीन ने पिता के नक्शे कदम पर ही चलना पसंद किया, लेकिन विरासत के बाद भी उन्होंने संगठन में विधायक बनने के बावजूद निचले स्तर से काम शुरू किया और करते चले गए। उन्होंने कभी भी अपने ऊपर परिवारवाद के स्टांप को छूने तक नहीं दिया। कहा जाता है कि पिता से अमित साह के अच्छे संबंध रहे हैं।

दो बार युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री

नितिन नबीन दो बार भाजपा के राष्ट्रीय युवा मोर्चा के महामंत्री रहे। भाजपा की सेकेंड लाइन को तैयार करने की रणनीति की जो चर्चा हमने ऊपर की, वो यही थी। नितिन नबीन की काबिलियत को संगठन ने पहचान लिया था। नबीन चाहे उम्र में कम हों लेकिन संगठन और सरकार में उनका गहन अनुभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उन पर आशीर्वाद और गृह मंत्री अमित शाह का उन पर अटूट विश्वास उनकी ताकत है।

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