भोपाल। इंदौर के शीतलामाता बाजार में मुस्लिम कर्मचारियों को निकालने के मामले में प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा है कि इंदौर पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती है तो वे इस मामले में कोर्ट की शरण लेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रकरण दर्ज करने के बजाए अपराधियों को शरण दे रही है।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चार की विधायक मालिनी गौड़ के बेटे और हिन्द रक्षक संगठन के प्रमुख एकलव्य सिंह गौड़ के जिहादी मानसिकता के लोगों को बाजार से हटाने के फरमान के बाद सियासत गर्म है। पिछले दिनों दिग्विजय सिंह शीतलामाता बाजार गए थे। वे एकलव्य गौड़ के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने सराफा थाने भी गए थे। उस समय दिग्विजय सिंह का मार्केट में जमकर विरोध हुआ था। लोगों ने वापस जाओ के नारे के साथ चूड़ियां भी फेंकी थी।
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बुधवार को दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया लिखा है- भाजपा का यह कदम न केवल असंवैधानिक है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। दुख की बात यह है कि मध्यप्रदेश पुलिस, एफआईआर दर्ज करने के बजाय आरोपियों को संरक्षण देती नजर आ रही है। 15 सितंबर 2025 को प्रभावित कारीगरों, दुकानदारों और इंदौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मिलकर पुलिस कमिश्नर को विधायक पुत्र पर एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रतिवेदन सौंपा था, लेकिन आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। 27 सितंबर को जब उन्होंने स्वयं संबंधित थाने में जानकारी ली, तो स्थानीय एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि 21 सितंबर को ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय से वह प्रतिवेदन सराफा थाने को भेजा गया था। यानी, इंदौर जैसे शहर में आज के तकनीकी युग में इतने संवेदनशील मामले को थाने तक पहुंचने में एक सप्ताह लग गया। दिग्विजय सिंह के अनुसार अब एडिशनल कमिश्नर एफआईआर दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का और समय मांग रहे हैं। यह पुलिस की संवेदनशील मामलों में गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि हम 5 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे, यदि एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।



