लाशें बिछ रही हैं और आप ब्रांडिंग कर सिर्फ संगम में डुबकी लगाने वालों के आंकड़े गिन रहे, आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?

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इंदौर। प्रयागराज में महाकुंभ 144 साल बाद लगा है। जीवन में यह मौका फिर नहीं मिलने वाला। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक इसकी ब्रांडिंग कर रहे हैं। यह भी कहा गया था कि प्रयागराज में श्रद्धालुओं के लिए महाइंतजाम किया गया है। रेलवे सहित अन्य विभागों से भी महाइंतजाम का दावा किया गया, लेकिन यह सारे दावे फेल होते नजर आए। इसका सबसे ताजा सबूत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ है, जिसमें 18 से अधिक लोगों की मौत की स्वीकारी जा रही है।
इस महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर इतनी तगड़ी ब्रांडिंग की गई लोग प्रयागराज की तरफ भागने लगे, लेकिन वहां जाकर वापस लौट रहे लोगों के अनुभव अच्छे नहीं रहे। इसका पहला उदाहरण 29 जनवरी को संगम के पास मची भगदड़ रही है, जिसमें सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 30 लोगों के मौत की बात कही जा रही है। यह आंकड़े भी मीडिया और विपक्ष के तमाम दबाव के बाद भगदड़ मचने के करीब 18 घंटे बाद बताए गए। बताया जाता है कि अभी भी कई लोग भगदड़ के बाद अपने परिजनों को ढूंढ रहे हैं।
नई दिल्ली स्टेशन पर तो लापरवाही की हद
प्रयागराज में महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हुआ है और तब से श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं हो रही है। अब तक के ट्रेंड बता रहे हैं कि शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके बावजूद भाजपा की सरकार का रेल मंत्रालय मासूम बना रहता है, जिसका नतीजा शनिवार रात नई दिल्ली स्टेशन पर मची भगदड़ है। ताज्जुब तो इस बात का है कि रेलवे स्टेशन पर इतनी भीड़ देखने के बाद भी रेल प्रशासन सोया रहता है। न तो ट्रेनों की जानकारी ठीक से दी जा रही थी और न ही प्लेटफॉर्म पर भीड़ रोकने के कोई प्रयास हुए। भगदड़ मचने के काफी देर बाद तो लोग परेशान होते रहे, लेकिन उन्हें इलाज के लिए भी पूछने वाला कोई नहीं था।
महाइंतजाम के बाद भी लगती रही बार-बार आग
प्रयागराज महाकुंभ में महाइंतजाम के बाद भी बार-बार आग लगती रही। 19 जनवरी को सेक्टर 19 में गीता प्रेस के कैंप में आग लगी थी, हादसे में 180 कॉटेज जल गए। इसी तरह 30 जनवरी को सेक्टर 22 में आग लगी थी, जिसमें 15 टेंट जले थे। इसके बाद 7 फरवरी को सेक्टर-18 में आग लगी थी। हादसा शंकराचार्य मार्ग पर हुआ था, जिसमें 22 पंडाल जल गए। फिर 15 फरवरी को आग लगी। कई छोटी-मोटी आग की घटनाएं तो होती ही रही हैं।
जाम में कई दिनों तक फंसे रहे लोग
महाकुंभ में माइंतजाम की ब्रांडिंग का ही नतीजा है कि पिछले दो वीकेंड से लोग यूपी जाने वाली हर सीमा पर महाजाम भी लगा। पिछले सप्ताह तो मध्यप्रदेश-यूपी बॉर्ड की हालत यह थी कि लोग दो-दो दिन तक जाम में फंसे रहे। खाना-पानी यहां तक कि टॉयलेट की व्यवस्था भी नहीं थी। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और महिलाओं को हुई है। मध्यप्रदेश में तो जब हालत बिगड़े तो खुद सीएम डॉ.मोहन यादव को मोर्चा संभालना पड़ा।
प्रयागराज से हर तरफ बइइंतजामी की खबर
जो लोग महाकुंभ से लौट कर आ रहे हैं, उनके अनुभव बताते हैं कि यूपी सरकार के महाइंतजाम के सारे दावे खोखले साबित हुए हैं। पिछले सप्ताह हालत यह थी कि प्रयागराज में भोजन से लेकर पानी तक का संकट लोगों ने झेला है। शहर में आटा तक खत्म होने की खबरें आ रही थीं। खाने और नाश्ते की कीमतें तो खैर छोड़ ही दीजिए।
आंकड़े गिन कर ही खुश हैं सीएम योगी
इन सारी बदइंतजामी और इतनी मौतों के बावजूद सीएम योगी बार-बार यह बयान देकर ही खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे है कि 50 करोड़ से अधिक लोगों ने संगम में डुबकी लगाई। योगी इस बात को लेकर भी गदगद हैं कि इससे यूपी के राजस्व का काफी फायदा हुआ है। योगीजी आप अभी लोगों को महाकुंभ की ब्रांडिंग कर बुला रहे हैं, लेकिन क्या अपने यहां के इंतजामों के बारे में सोचा है? खैर, ब्रांडिंग तो आपकी भी अच्छी हो गई है, पीएम मोदी से लेकर सारे बड़े नेताओं को अपनी निगरानी में आपने संगम में डुबकी जो लगवा दी है।
सवाल उठाने वालों को हिंदू विरोधी बता दिया
जब महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर लोगों या राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए तो उन्हें हिंदू विरोधी बता दिया गया। खबरों को दबाने की कोशिश की गई और जिन्होंने कोई पोस्ट कर दिया उनके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज कर लिए गए। योगीजी, सबसे बड़ा सवाल तो उसी दिन खड़ा हो गया था जब आप संगम पर मची भगदड़ के आंकड़े छुपाने में जुट गए थे। अभी भी देर नहीं हुई है, अब तो यूपी सरकार और भारत सरकार इतना तो कर ही सकती है कि आगे के दिनों में जो प्रयागराज जाने वाले हैं वे सही सलामत संगम में डुबकी लगाकर लौट आएं।

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