नहीं थम रहा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद, अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस देकर पूछा-नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिख रहे?

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प्रयागराज। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में लगे माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने के बाद से हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार देर रात प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि वे अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि आप खुद को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का भी उल्लेख किया गया है जिसमें न्यायालय ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। नोटिस में लिखा गया है कि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रश्नगत अपील निस्तारित नहीं कर दी जाती या कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के संबंध में पारित नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में कहा गया है कि माघ मेले में आपके शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित/प्रदर्शित किया गया है। आपने इस कृत्य/प्रदर्शन से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना दर्शित हो रही है। इसलिए आप 24 घंटे के अंदर ये स्पष्ट करें कि आप द्वारा अपने नाम के सम्मुख शंकराचार्य शब्द का प्रयोग या अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रचारित/प्रसारित कैसे किया जा रहा है?

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-यह प्रशासन नहीं तय करेगा

इस मामले पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन ये नहीं तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं है। भारत के राष्ट्रपति भी शंकराचार्य नहीं तय कर सकते, शंकराचार्य वही हैं, जिनको तीनों शंकराचार्य मानें और 2 पीठ के शंकराचार्य हमको लेकर पिछले माघ मेले में स्नान कर चुके हैं।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पद की वैधता को लेकर स्पष्ट कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार वही व्यक्ति शंकराचार्य होता है, जिसे अन्य पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने बताया कि शृंगेरी और द्वारका पीठ के शंकराचार्य उन्हें विधिवत स्वीकार करते हैं और पिछले माघ मेले में उनके साथ शाही स्नान भी कर चुके हैं, जबकि पुरी पीठ के शंकराचार्य ने भी उनके विरुद्ध कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भी विरोध का कोई उल्लेख नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है।

Ardhendu Bhushan
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Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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