अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पीएम मोदी को बताया ‘बेहतर वार्ताकार’, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीद जताई
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ‘बेहतर वार्ताकार’ करार देते हुए कहा है कि भारत उन पहले देशों में हो सकता है, जो पारस्परिक टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करेगा। एक समाचार चैनल के साक्षात्कार में वेंस ने यह बार कही ।
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भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ पर सकारात्मक बातचीत
जेडी वेंस ने कहा कि टैरिफ को लेकर भारत के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि भारत उन देशों में से है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित उच्च आयात शुल्क से बचने के लिए अमेरिका से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, इनमें से अधिकांश वार्ताएं अभी रुकी हुई हैं।
पीएम मोदी की वार्ता शैली की सराहना
वेंस ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी एक सख्त लेकिन प्रभावी वार्ताकार हैं। हम भारत के साथ संबंधों को फिर से संतुलित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कर रहे हैं, वो कर रहे हैं।”
अमेरिकी किसानों के लिए भारतीय बाजार खोलने पर जोर
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाजार अमेरिकी किसानों के लिए खुले।
उनके अनुसार:
- भारत में अभी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार बंद है।
- अमेरिकी किसान बेहतरीन फसल उगाते हैं, लेकिन उन्हें भारतीय बाजार में बेचने का मौका नहीं मिलता।
- इसके चलते अमेरिका को विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है।
वेंस ने कहा कि संभावित व्यापार समझौते से भारत में अमेरिकी तकनीक और कृषि उत्पादों के लिए दरवाजे खुलेंगे, जिससे अमेरिका में नौकरियां बढ़ेंगी और दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे।
“भारत ने लंबे समय तक अमेरिका का फायदा उठाया”: वेंस
साक्षात्कार में वेंस ने कहा, “सच कहूं तो भारत ने लंबे समय तक अमेरिका का व्यापारिक फायदा उठाया है। राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार के खिलाफ नहीं, बल्कि अनुचित व्यापार के खिलाफ हैं। हम ऐसा व्यापार नहीं चाहते जिसमें विदेशी देश अमेरिका को नुकसान पहुंचाएं।”
व्यापार डील को अंतिम रूप देने की कोशिश
गौरतलब है कि फरवरी में वाशिंगटन डीसी में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई थी, जहां व्यापार समझौते पर सिद्धांत रूप में सहमति बनी थी। अब दोनों देश इस डील को अंतिम रूप देने की संयुक्त कोशिश कर रहे हैं।यह डील टैक्स में छूट, बाजार तक पहुंच, और न्यायसंगत व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित होगी।



