नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहाई का आदेश दे दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रोफेस को जमकर फटकार भी लगाई। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए पोस्ट में प्रोफेसर ने जो बातें लिखी हैं, उसे डॉग व्हिसलिंग कहते हैं। उन्होंने प्रोफेसर से पूछा है कि उन्हें इस चीप पब्लिसिटी की क्या जरूरत थी।
उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर ने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। रविवार को प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार को जिला अदालत ने 27 तक अली खान को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आतंकी आकर हमारे देश पर हमला करके चले जाते हैं और आपको इस चीप पॉप्यूलेरिटी की जरूरत है। हर किसी को स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है…. लेकिन क्या ये समय है इन सबके बारे में बात करने का? देश पहले ही किस दौर से गुजर रहा है। कुछ आतंकी हमारे देश में आए और लोगों पर हमला कर दिया… हमें एकजुट होने की जरूरत है। ऐसे समय में ऐसी चीप पॉप्युलेरिटी की आवश्यकता थी?
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