सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने भीषण गर्मी के बीच भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया है और इसे अपनी “रेड लाइन” करार दिया है।
पाकिस्तान की ओर से लगातार आक्रामक बयान सामने आ रहे हैं। यहां तक कि इस मुद्दे पर भारत को युद्ध जैसी धमकियां भी दी जा चुकी हैं। हाल ही में पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत “जल आतंकवाद” की नीति अपना रहा है।
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तरार ने कहा कि पाकिस्तान के लिए पानी जीवनरेखा है और इसे रोका गया तो इसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर रहा है।
दरअसल, भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इसके बाद से पाकिस्तान में चिंता गहराई है। पाकिस्तान का कहना है कि अगर नदियों का पानी रोका गया, तो उसकी बड़ी आबादी गंभीर संकट में पड़ सकती है।
इस मुद्दे को पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों, यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाया है, जहां उसने गर्मियों के दौरान अपनी जल सुरक्षा पर खतरे की बात कही है। हालांकि, भारत अपने रुख पर कायम है।
भारत का स्पष्ट कहना है कि जब तक उसकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक संधि को बहाल करना मुश्किल है। भारत ने इस मुद्दे पर कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया है।
कुल मिलाकर, सिंधु जल संधि अब केवल जल बंटवारे का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक टकराव का बड़ा कारण बनता जा रहा है।


