दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आबकारी मामले में चल रही अपील याचिका की सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला लिया है। उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता को पत्र लिखकर साफ कहा कि उन्हें इस अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं है और उनकी ओर से कोई वकील भी पेश नहीं होगा।
इससे पहले अरविंद केजरीवाल भी इसी मामले में अदालत की कार्यवाही से दूरी बना चुके हैं। दोनों नेताओं का आरोप है कि जज के परिवार के सदस्यों का संबंध केंद्र सरकार के पैनल से होने के कारण निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।
👉 यह भी पढ़ें:
- राष्ट्रगान विवाद पर बढ़ा टकराव: तमिलनाडु विधानसभा सत्र से राज्यपाल आर एन रवि का वॉकआउट
- मनीष सिसोदिया ने एमएलए दफ्तर से एसी-टीवी तक चुरा लिया;बीजेपी विधायक रविंद्र नेगी का आरोप
- हार के डर से आप ने मनीष सिसोदिया की बदली सीट, आम आदमी पार्टी की दूसरी सूची में 20 उम्मीदवारों के नाम
- खत्म नहीं हो रही सिसोदिया की मुश्किलें, जमानत पर सुनवाई टली, जज ने खुद को केस से किया अलग
सिसोदिया ने अपने पत्र में कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के पैनल में जज के बच्चों का नाम होने से हितों का टकराव बनता है। ऐसे में उन्होंने इसे “सत्याग्रह” का रास्ता बताते हुए अदालत की कार्यवाही में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर चुका है, जिसमें उन्होंने न्यायाधीश से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी। इसके बाद अब दोनों नेताओं ने अदालत में पेश न होने का फैसला लिया है।
आबकारी नीति से जुड़े इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने सिसोदिया और केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों नेता लंबे समय तक जेल में भी रहे, हालांकि फरवरी 2026 में निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था।
अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने उस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर फिलहाल सुनवाई जारी है। एक ओर जहां आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार का गंभीर मामला मान रही हैं।


