असदुद्दीन ओवैसी ने इंदौर उच्च न्यायालय के भोजशाला परिसर से जुड़े हालिया फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के फैसले की तरह दिखाई देता है, जिसमें एक धर्म को बढ़त मिली और दूसरे धर्मों के पूजा-अधिकार कमजोर हुए।
ओवैसी ने कहा कि यह फैसला भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों की पवित्रता को चुनौती देने का रास्ता खोल सकता है। उनके अनुसार, “अब कोई भी किसी भी पूजा स्थल के स्वरूप पर सवाल उठा सकता है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।”
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उन्होंने न्यायपालिका के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पूजा स्थल कानून को संविधान के मूल ढांचे से जोड़ा था, लेकिन अब उसी सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि पूजा स्थल कानून का मजाक बनाया जा रहा है।
बाबरी मस्जिद प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह फैसला पूरी तरह आस्था के आधार पर दिया गया था। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का निर्णय आगे कई नए विवादों को जन्म देगा, लेकिन उस समय मेरी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।”



